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यूपी का रण : इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद में जातीय गढ़ों को साधने की चुनौती

Mon, 10 Jan 2022 04:49 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद जिले में विधानसभा की कुल 17 सीटें हैं। 2017 में ऐसी लहर चली की सपा का गढ़ माने जाने वाले जिलों में भी भगवा परचम फहराया। इटावा की तीन सीटों में से भाजपा दो जीत गई, जबकि सपा के हिस्से सिर्फ जसवंतनगर सीट आई।
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सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सबसे पहले बात चुनावी समरभूमि की। उसके भूगोल की और इतिहास की। इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद जिले में विधानसभा की कुल 17 सीटें हैं। 2017 में ऐसी लहर चली की सपा का गढ़ माने जाने वाले जिलों में भी भगवा परचम फहराया। इटावा की तीन सीटों में से भाजपा दो जीत गई, जबकि सपा के हिस्से सिर्फ जसवंतनगर सीट आई। कन्नौज जिले की भी तीन सीटों में से सिर्फ कन्नौज सीट ही सपा जीत सकी, बाकी दो भाजपा के हिस्से में चली गईं। फर्रुखाबाद की चारों और औरैया की तीनों सीटों पर भाजपा कमल खिलाने में कामयाब रही थी। अलबत्ता, मैनपुरी में साइकिल तेज दौड़ी और चार सीटों में से तीन पर सपा ने कब्जा जमा लिया। महज एक सीट ही यहां भाजपा जीत पाई।   

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मैनपुरी : सड़कें तो खूब बनीं... पर रोजगार का क्या?
सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि रही मैनपुरी में मतदाता सभी दलों के विकास कार्यों को परख रहे हैं। परंपरागत वोटर भले ही अपने दल के साथ चला जाए, लेकिन प्रत्याशी के चेहरे व विकास पर मिलने वाला वोट ही निर्णायक साबित होगा। मैनपुरी की सदर विधानसभा सीट के मतदाताओं का अपना अलग ही मिजाज है। शहर के स्टेशन रोड स्थित एक दुकान पर चाय की चुस्कियां लेते मिले कृष्ण मुरारी मिश्र कहते हैं, चौड़ी-चौड़ी सड़कों और सरकारी भवनों के निर्माण तो सपा सरकार में खूब हुए, लेकिन जो होना चाहिए, वह आज तक नहीं हो सका। क्या नहीं हुआ? यह सवाल हमने दागा ही था कि बीच में ही दिलीप राठौर बोल पड़े- चाहिए तो रोजगार..., जब आमदनी नहीं होगी तो सड़कों पर क्या ख्याली जहाज दौड़ाएंगे। उनकी बात का समर्थन पास बैठे अन्य लोगों ने भी किया। प्रकाश दिवाकर कहते हैं, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज हों या फिर पॉलीटेक्निक, सब सपा सरकार में ही बने। इससे शिक्षा सुधरी। प्रकाश की आवाज को और स्पष्ट करते हुए अंकुर गुप्ता ने कहा कि यहां के लोग तो पार्टी के नाम पर वोट करते हैं। प्रत्याशी चाहे जो हो, इससे फर्क नहीं पड़ता।

करहल : दल के नाम पर ही यहां मिलेगा वोट
करहल विधानसभा क्षेत्र के घिरोर पहुंचे तो कुछ लोग चुनावी चर्चा में मशगूल मिले। रामदीन और दिलदान मोहम्मद ने कहा कि भाजपा खूब जोर लगाती है, मगर सपा से पार पाना इस बार भी मुश्किल नजर आ रहा है। शिवपाल-अखिलेश के मिलने से वोट नहीं बिखरेगा। वहीं, ख्यालीराम ने कहा कि यहां ओबीसी मतदाता बहुतायत में हैं। गरीब, किसान और कामगार तबका सरकार की योजनाओं का फायदा तो उठा रहा है, लेकिन दलगत आधार पर बंटा हुआ है। लोगों की बात से साफ हो जाता है कि यहां चुनावी मुकाबला जोरदार होगा।
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किशनी : छुट्टा गोवंश का सवाल हर जगह 
किशनी विधानसभा क्षेत्र के किशनी बस स्टैंड पर मिले दिनेश सिंह कहते हैं कि छुट्टा पशुओं ने फसलों काे खूब नुकसान पहुंचाया। किसानों ने खेतों पर जाग-जागकर रातें काटी हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुनींद्र सिंह चौहान ने कहा, पशुओं को छोड़ने वाले भी तो हम सब ही हैं। मुनींद्र यहीं नहीं रुकते। वह भाजपा सरकार की उपलब्धियां भी गिनाने लगते हैं। बीच में टोकते हुए राघव बोल पड़े- किसानों के पास खाने को ही नहीं होगा, तो वह क्या करेगा? हम तो उसे ही वोट देंगे जो छुट्टा गोवंशों से निजात दिलाए।

फर्रुखाबाद : विकास दरकिनार, जातीय गणित तारणहार

फर्रुखाबाद में चुनावी माहौल गर्माते ही स्थानीय मुद्दे दरकिनार होते नजर आ रहे हैं। लोग विकास के नाम पर दो ओवरब्रिज की चर्चा करते हैं तो गंगा एक्सप्रेसवे के शाहजहांपुर चले जाने को लेकर निराशा भी जताते हैं। गौशालाएं खुलने से ज्यादा चर्चा छुट्टा जानवरों से हो रही परेशानी की  हो रही है। फर्रुखाबाद सदर विधानसभा क्षेत्र के ब्लाॅक प्रिंटिंग कारीगर रकाबगंज खुर्द के आरिफ खान और तलैया साहबजादगान के गुड्डू खान कहते हैं, कई देशों में व्यवसाय होने के बावजूद हम कारीगरों को कुछ नहीं मिला। इस सरकार ने ओडीओपी योजना में शामिल किया, मगर क्रिस्टल बाजार नहीं होने की वजह से प्रगति नहीं हो रही। 

नेकपुर खुर्द के नेम सिंह शाक्य सरकार की तारीफ करते हुए कहते हैं कि आलू का क्षेत्र होने से यहां फैक्टरी लगे तो किसानों की तरक्की तेजी से हो। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव नगला हूसा के रामनरेश मिश्रा कहते हैं, यह क्षेत्र गंगा और रामगंगा के दोआब में है। बाढ़ से तबाही होती है। यदि गंगा एक्सप्रेसवे मिल जाता, तो काफी प्रगति होती। भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव आजादनगर भटपुरा के शत्रुघ्न शुक्ला ने कहा कि महमदगंज मड़ैया घाट के पास गंगा में पुल का एस्टीमेट जा चुका। उम्मीद थी कि निर्माण की घोषणा हो जाएगी, मगर मायूसी हाथ लगी। पुल नहीं होने से पूरे क्षेत्र का विकास तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। कायमगंज विधानसभा क्षेत्र के कपिल दो दशक से अधिक समय से बंद पड़े सूत मिल का मुद्दा उठाते हैं। गांव कादर दादपुर सराय के जोगराज सिंह कहते हैं, सरकार ने कई बंद उद्योगों को चलवा दिया। सूत मिल चलने की उम्मीद थी, मगर उस पर पानी फिर गया। ग्रामीण कानून-व्यवस्था के मामले में सरकार की तारीफ करते दिखे। हालांकि, ये मुद्दे कितना रंग दिखाएंगे यह अलग सवाल है। क्योंकि, ज्यादातर लोगों की बातों से ऐसा सामने आया कि वे जातीय उम्मीदवार को तवज्जो देंगे।

औरैया : उद्योगों की चर्चा के साथ विकास मुख्य मुद्दा
नए परिसीमन के बाद औरैया विधानसभा सीट आरक्षित (सुरक्षित) हो गई। अब जिले में दिबियापुर एवं बिधूना सामान्य सीटें हैं। दिबियापुर विधानसभा में गेल, एनटीपीसी जैसी प्रमुख कंपनियां हैं। प्लास्टिक सिटी और प्रदेश के पहले इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की प्रक्रिया भी तेजी के साथ चल रही है। दिबियापुर के एक मार्केट प्लाजा में व्यापारियों में चर्चा चल रही थी। बहस का विषय था कि इस बार भाजपा को सपा से टक्कर मिलेगी। बिधूना के संजय कुमार कहते हैं कि यहां बस स्टैंड तो है, लेकिन बसें रुकती नहीं हैं। परिवहन सेवा बेहतर हो तो लोगों को राहत मिले। नेत्र चिकित्सालय और मातृ शिशु अस्पताल भी बना खड़ा है, मगर चालू नहीं हो सका है। औरैया के धर्मेश दुबे कहते हैं कि पचनद बैराज के बनने से विकास की उम्मीदें जगी हैं। इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा सकता है।
 
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इटावा : कहीं परिवार हावी, तो मुद्दों की चर्चा भी कम नहीं

इटावा जिले की जसवंतनगर सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ है। वर्ष 1980 के बाद से मुलायम परिवार का ही कोई व्यक्ति यहां जीतता रहा है। शिवपाल सिंह यादव यहां से लगातार पांच बार से विधायक हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार बेरोजगारी, छुट्टा जानवर और महंगाई को लेकर खूब चर्चा है। पर, ये मुद्दे परिवार के आगे गौण हो जाते हैं। हालांकि, व्यापार संगठन के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता का कहना है कि जो नेता विकास कराएगा, जनता उसके पक्ष में ही मतदान करेगी। वहीं, इटावा विधानसभा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर छुट्टा जानवरों से हो रही समस्या के साथ महंगाई भी ज्यादातर लोगों की जुबान पर है। डीएपी खाद को लेकर भी लोग मुखर हैं, लेकिन मतदान को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। स्थानीय नागरिक मुन्ना मिश्रा का कहना है कि जनता ने सपा और भाजपा, दोनों सरकारों का कार्यकाल देखा है। लड़ाई तो भाजपा और सपा में ही है। भरथना (सुरक्षित) सीट त्रिकोणीय मुकाबले में घिरी है। लोगों का कहना है कि सपा के दबदबे वाली इस सीट पर भाजपा और बसपा भी मुकाबले में हैं। यहां कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर लोग मुखर हैं, तो छुट्टा जानवर, सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार को लेकर थोड़ा गुस्सा भी। बकेवर निवासी युवा आलोक मिश्रा और मुनीष मिश्रा भी कहते हैं कि कई मुद्दे सरकार के पक्ष में हैं, तो कई उनके खिलाफ भी हैं।

कन्नौज : मुद्दों पर नाराजगी, तो सुविधाओं की सराहना भी
एससी बहुल कन्नौज सदर (सुरक्षित) सीट पर ब्राह्मण, यादव व कटियार मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद है। समाजसेवी और रिटायर्ड मेजर एनसी टंडन कहते हैं, कोरोना काल में वैक्सीन वरदान साबित हुई है। सरकार ने फ्री राशन दिया है। इन सबको मतदाता नोटिस कर रहे हैं। इसका फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है। वहीं, जूता-चप्पल विक्रेता, बख्तियार अली, विजय कुमार, अनुज कुमार, बीज विक्रेता रामवीर बघेल और राहुल कुमार स्थानीय समस्याओं को लेकर सवाल उठाते हैं। हम तहसील परिसर पहुंचे तो वहां भी चुनावी चर्चा होते मिली। डीएन इंटर कॉलेज के प्रवक्ता योगेंद्र बघेल, मो. शहीद, एमसी पाल और धीरेंद्र बघेल बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में छुट्टा जानवरों को लेकर काफी सवाल हैं। पर, योजनाओं को लेकर तारीफें भी कम नहीं हैं। हम छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे तो वहां भी छुट्टा जानवरों और खाद के मुद्दे पर लोग मुखर मिले। अंकुर दीक्षित, आकाश गुप्ता, विकास दुबे, राजकिशोर, गुड्डू, उमाशंकर, शिवम, शिवा, मुबीन व पिंटू रोडवेज बस स्टॉप, 50 बेड वाले महिला अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट के लिए जनरेटर, सड़कों के काम गिनाते हैं। छिबरामऊ महोत्सव के संयोजक गौरव त्रिपाठी कहते हैं कि जनहित की योजनाएं लोगों तक पहुंच रही हैं, इसका फायदा भाजपा को मिल रहा है।
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