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मैनपुरी उपचुनाव : रामगोपाल कर रहे हैं शिवपाल की बातों का समर्थन, मंच से शुरू और मंच पर ही खत्म हो रहीं दूरियां

Mon, 21 Nov 2022 09:10 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

करीब पांच साल पहले मंच से ही प्रो रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच विवाद शुरू हुआ। हालात यहां तक पहुंचे कि दोनों ने मोर्चा खोल दिया। एक-दूसरे के खिलाफ सियासी मैदान में भी ताल ठोंक दी। अखिलेश पर आरोप लगे कि वह प्रो रामगोपाल की सलाह मान रहे हैं।
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मंच पर रामगोपाल, अखिलेश यादव और शिवपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के लिए मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव नित नए आयाम गढ़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रो रामगोपाल यादव मंच से शिवपाल की बातों का समर्थन कर रहे हैं। एक-दूसरे को लेकर तल्ख रूख अपनाने वाले दोनों के चेहरे पर समान रूप से मुस्कुराहट देखी जा रही है। इस मुस्कुराहट की केंद्र बिंदु बने हैं अखिलेश यादव। इसे पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखद संदेश के रूप में देख रहे हैं।

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करीब पांच साल पहले मंच से ही प्रो रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव के बीच विवाद शुरू हुआ। हालात यहां तक पहुंचे कि दोनों ने मोर्चा खोल दिया। एक-दूसरे के खिलाफ सियासी मैदान में भी ताल ठोंक दी। अखिलेश पर आरोप लगे कि वह प्रो रामगोपाल की सलाह मान रहे हैं। यही वजह है कि शिवपाल किनारे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद भी कमोवेश यही हालात रहे। प्रो रामगोपाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने रिश्तेदार पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के संबंध में पत्र दिया। मीडिया में बयान आया कि यह पत्र पार्टी नेताओं के उत्पीड़न से जुड़ा है। इस पत्र का शिवपाल ने खुलासा किया। लेकिन मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हालात बदल रहे हैं।

इसकी झलक सैफई पांडाल में भी दिखी थी। जब मुलायम सिंह की पार्थिक देह पर पुष्प चंक्र चढ़ाने के लिए शिवपाल ने उठाया तो बगल में खड़े प्रो रामगोपाल ने भी हाथ लगा दिया था। इस वक्त इन दोनों की आंखें डबडबा गई थीं। लेकिन वास्तविक एकजुटता मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में दिख रही है। दो दिन से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक तरफ शिवपाल तो दूसरी तरफ प्रो रामगोपाल नजर आ रहे हैं। सोमवार को चुनावी जनसभा में जब शिवपाल के संबोधन के बाद प्रो रामगोपाल यादव ने उनकी बात का समर्थन किया तो दोनों के नाम के जयकारे लगने लगे। स्थिति साफ है कि शिवपाल की बात का प्रो रामगोपाल द्वारा किया गया समर्थन पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को ताकत दे रहा है। दोनों डिंपल को रिकार्ड मत से जीताने की अपील कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इन दोनों भाइयों का वैचारिक मतभेद खत्म होना पार्टी के लिए सुखद है। नेताजी के समय भी इन दोनों ने अपनी जिम्ेमदारी निभाई थी।

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