चुनावी रणभूमि में ऐसे भी किस्से हैं जब उम्मीदवार बिना लड़े ही चुनाव जीत गए। बिजनौर संसदीय सीट पर आज भी एक ऐसा ही किस्सा लोगों को याद आता है। बात 1971 के लोकसभा चुनाव की है।
कांग्रेस (जे) के स्वामी रामानंद शास्त्री ने इस सीट से चुनाव जीता था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद रिक्त हुई इस सीट पर उपचुनाव हुआ। 1974 में हुए इस उपचुनाव में कांग्रेस में गुटबाजी हुई और कई दावेदार खड़े हो गए। उस समय कांग्रेस नेता क्रांति कुमार की तूती बोलती थी।
उन्होंने दांव चला और कांग्रेस कार्यालय में लिपिक के रूप में काम करने वाले शाहपुर रतन गांव के रहने वाले रामदयाल का नाम चुनाव लड़ने के लिए प्रस्तावित कर दिया। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास यह प्रस्ताव भेजा तो उन्होंने भी हरी झंडी दे दी।
रामदयाल के मुकाबले जनसंघ से मंगू सिंह और बीकेडी से चौधरी हरफूल सिंह ने पर्चा दाखिल किया था। बाद में अचानक इस तरह से राजनीतिक पैंतरे चले कि दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया। इससे रामदयाल निर्विरोध सांसद निर्वाचित हुए।