विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों का समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। यूपी के चुनाव की सियासी सरगर्मियां लखनऊ से दिल्ली तक पहुंच गई हैं। सियासी गलियारों में जोड़तोड़ और खरीद-फरोख्त की चर्चाएं होने लगी है।
राज्यसभा के लिए निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा की चुनावी रणनीति को तीन दिन से दिल्ली से अंजाम दिया जा रहा है। कांग्रेस के कपिल सिब्बल और सपा के अमर सिंह भी देश की राजधानी में बैठकर लखनऊ पर नजर लगाए हुए हैं।
विधान परिषद की 13 सीटों पर 10 जून और राज्यसभा की 11 सीटों पर 11 जून को मतदान होना है। इसके लिए क्रमश: 14 व 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। सपा, कांग्रेस और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी को राज्यसभा चुनाव के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने हैं। सबसे ज्यादा चुनौती प्रीति महापात्रा के सामने है। उन्हें चुनाव जिताने की जिम्मेदारी भाजपा की है।
भाजपा के कुछ विधायक और नेता उनके चुनाव की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। बसपा से भाजपा में आए राज्यसभा सदस्य जुगल किशोर को बसपा में घुसपैठ कर कुछ वोट जुटाने का काम सौंपा गया है। भाजपा को बसपा के कई विधायकों से क्रास वोटिंग की उम्मीद है। ऐसी ही संभावना सपा में तलाशी जा रही है।