फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

1971 की सियासी जंग: चुनावी समर में राजा ने चाचा को हराया और बन गए 'यूपी टाइगर', पढ़ें - रोचक किस्सा

Tue, 19 Mar 2024 06:26 PM IST
ishwar ashish संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर

सार

गोंडा सीट से वर्ष 1971 में चाचा- भतीजे के सियासी जंग से रोमांचक चुनाव हुआ था। मनकापुर के राजा आनंद सिंह गोंडा व बलरामपुर की राजनीतिक धुरी माने जाते थे।
विज्ञापन
देवेंद्र प्रताप सिंह व आनंद सिंह। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोंडा ही नहीं बलरामपुर की राजनीति के भी धुरी माने जाने वाले मनकापुर रियासत के राजा आनंद सिंह ने वर्ष 1971 में सगे चाचा देवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ लल्लन साहब को लोकसभा चुनाव में पराजित कर सियासत को नई दिशा दी। राजनीति में सब जायज है कि कहावत को चरितार्थ करने वाले राजा आनंद सिंह भले ही सियासी बनवास पर हैं, लेकिन चुनाव दौर में फिर चर्चा में हैं।

विज्ञापन


कांग्रेस 1971 के चुनाव में दो फाड़ हो गई थी। कांग्रेस सिंडिकेट से राजा आनंद सिंह गोंडा संसदीय सीट से मैदान में तो कांग्रेस इंडिकेट (आई) ने उनके चाचा और विधान परिषद के उपसभापति कुंवर देवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ लल्लन साहब को प्रत्याशी बनाया। चुनाव बेहद रोमांचक रहा, चाचा-भतीजे की चुनावी जंग कड़े मुकाबले से गुजरी, जिसमें कुंवर आनंद सिंह ने जीत हासिल कर संसद में प्रवेश किया। इस चुनाव से न सिर्फ राजा आनंद सिंह का कद बढ़ा, बल्कि वह अपनी बेबाकी है, बेदाग छवि से यूपी टाइगर कहलाने लगे।

ये भी पढ़ें - लखनऊ सीट का रोचक इतिहास: पिता हेमवती नंदन बहुगुणा ने जीत का इतिहास रचा तो बेटी ने हार का
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - बाराबंकी सीट पर उपेन्द्र के स्थान पर आएगा उम्मीदवार, कई मौजूदा सांसदों का कट सकता है टिकट
विज्ञापन


जिले की उतरौला विधानसभा के मतदाता गोंडा संसदीय सीट पर अपने सांसद का चुनाव करते हैं। उतरौला क्षेत्र में शुरुआत से ही राजा आनंद सिंह का दबदबा रहा। गोंडा संसदीय सीट से सांसद ही नहीं, देवीपाटन मंडल की राजनीति में भी दखल रखने वाले गोंडा के महाराजा आनंद सिंह के रोचक किस्से आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

अब सियासत से दूर, बेटे ने संभाली राजनीतिक विरासत
वर्ष 2012 में गठित गौरा विधानसभा से विधायक बने और सपा सरकार में कृषि एवं धमार्थ कार्य मंत्री रहे। लेकिन 2017 से उनकी सियासी पारी थम गई और अब वह राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। यह अलग बात है कि उनकी सियासी विरासत बेटे कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भय्या ने 1998 में संभाल ली थी। पहली बार वह सपा से सांसद बने, साल 2014 से भाजपा में हैं और गोंडा के सांसद हैं। इस बार भी भाजपा से मैदान में हैं।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें