रेलवे के उत्तर व पूर्वोत्तर सहित सभी जोन में मालगाड़ियों से गत वर्ष 94,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस वर्ष इनसे रेलवे ने 1,38,000 करोड़ रुपये कमाए। सवारी ट्रेनों से रेलवे ने गत वर्ष 41,000 करोड़ रुपये की कमाई की, जो साल कोरोना की वजह से सिर्फ 7300 करोड़ रुपये ही रही। सवारी गाड़ियों से लगातार नुकसान से मेमू-पैसेंजर चलाने से रेलवे कतरा रहा है।
इन स्टेशनों के यात्री परेशान होकर बस से कर रहे यात्रा
लखनऊ से कानपुर के बीच मेमू, पैसेंजर ट्रेनों से आम दिनों में 34 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। वहीं, लखनऊ से हरदोई के बीच तीन हजार, लखनऊ से सुल्तानपुर के बीच डेढ़ हजार, लखनऊ से बाराबंकी के बीच डेढ़ हजार और लखनऊ से सीतापुर के बीच पांच हजार यात्री सफर करते हैं। जो इन दिनों बसों से यात्रा कर रहे हैं और महंगा टिकट खरीदने के लिए मजबूर हैं।
रिजर्वेशन से रेलवे लगातार कमाई कर रहा है। वहीं, स्टेशनों पर अनारक्षित टिकट सिस्टम (यूटीएस) भी बंद कर दिए गए हैं। इन्हें शुरू कर दिया जाए तो पुष्पक जैसी ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। वहीं, ट्रेनों का संचालन बंद हुआ तो एमएसटी धारकों की मुश्किलें खड़ी होंगी। एमएसटी का रिन्यूअल नहीं हो पा रहा है।
प्रस्ताव तैयार, पर नहीं मिल रही झंडी
रेलवे प्रशासन ने पैसेंजर ट्रेनें चलाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए हैं, पर इन्हें हरी झंडी नहीं मिल रही है। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की ओर से लखनऊ से सीतापुर के बीच पैसेंजर, लखनऊ से कानपुर के बीच मेमू, सहारनपुर के बीच गोंडा के लिए, वाराणसी और बाराबंकी के लिए पैसेंजर इंटरसिटी चलाने का प्रपोजल है।
मामले पर उत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक संजय त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना वैक्सीन आने के बाद स्थितियों में सुधार हो रहा है। पैसेंजर ट्रेनों के संचालन पर भी मंथन शुरू हो गया है। इसकी तैयारियां की जा रही हैं।
ट्रेन-- यात्री -- आय
मेमू-- 45000 -- 3,60,000 प्रतिदिन।
मेल-एक्सप्रेस-- 65,000-- 58 से 60 लाख प्रतिदिन।
यह है मंडल की स्थिति
जोन-- यात्री-- आय
उत्तर रेलवे-- 7.66 करोड़-- 1227 करोड़
पूर्वोत्तर रेलवे-- 6.88 करोड़-- 873 करोड़
(यह आंकड़े आम दिनों के हैं। कोरोना काल में यात्री व आमदनी दोनों कम हुई है।)