पत्र में कहा गया है कि अति पिछड़े अनुसूचित जाति समूह बहुल गांवों में सर्वांगीण विकास के लिए संचालित एकीकृत विकास योजना के तहत जारी स्वीकृति संबंधी शासनादेश में खामियां थीं, आदेश के बावजूद इन्हें नहीं सुधारा गया।
इस प्रकरण में विभिन्न जिलों के 50 विकास कार्यों के लिए दूसरी किस्त के रूप में 12 करोड़ 37 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गईं। पत्र के अनुसार, इस वित्तीय अनियमितता संबंधी प्रकरण में निदेशक की भूमिका संदिग्ध मालूम होती है।
मीणा ने आगे लिखा है कि उनके कक्ष में महिला एवं बाल विकास संयुक्त समिति से संबंधित तैयारी बैठक में उठाए गए बिंदुओं पर निदेशक ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उत्तर मांगने पर विभागीय अधिकारियों को साथ लेकर निदेशक कक्ष से बाहर चले गए। बाद में मीडिया के सामने प्रमुख सचिव के खिलाफ बयानबाजी और नारेबाजी कराई गई, जिससे विभाग एवं शासन की छवि धूमिल हुई। इसे शासकीय नियमों और सरकारी आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन बताया गया है।