पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए दोनों आरोपी।
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इसी टीम ने बृहस्पतिवार भोर में करीब 4:30 बजे दोनों के हरदोई से पिसावां की ओर आने की जानकारी दी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की और मुठभेड़ में दोनों को ढेर कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार आठ मार्च को वारदात के बाद से ही एसओजी की स्वॉट, सर्विलांस और नारकोटिक्स टीमें शूटरों की तलाश में जुट गई। शूटरों के नोएडा में होने की जानकारी मिली। एसओजी ने वहां डेरा डाल दिया। कई दिन तक टीम के सदस्य फेरी वाले बनकर टोह लेते रहे।
नोएडा में शिकंजा कसते देखकर शूटर संजय तिवारी और राजू तिवारी हरदोई जनपद आ गए। एसओजी के इस इनपुट के आधार पर पुलिस कांवड़ियों के वेश में शूटरों की तलाश में जुट गई। तीन हजार नंबरों को शॉर्ट लिस्ट किया गया। उन्हें सर्विलांस पर लगाया गया। इनमें से संदिग्ध 60 नंबरों की विशेष रूप से जांच की गई। इधर, एसओजी को मुखबिर से बुधवार को ही इनपुट निला कि बृहस्पतिवार को शूटर हरदोई बॉर्डर क्रॉस करेंगे। दोनों सीतापुर जनपद की सीमा में आएंगे। उनका इरादा किसी दूसरे सुरक्षित ठिकाने पर जाने का है। यहां वह कुछ वारदात भी कर सकते हैं।
एसपी अंकुर अग्रवाल ने एसओजी प्रभारी सत्येंद्र विक्रम सिंह को स्ट्राइक टीम के साथ आगे रहने का निर्देश दिया। स्ट्राइक टीमों की संख्या दो रखी गई। तीसरी टीम एएसपी उत्तरी आलोक सिंह व चौथी टीम एएसपी दक्षिणी दुर्गेश सिंह के नेतृत्व में अलर्ट की गई। एसटीएफ की पांचबी टीम भी शामिल रही। एसटीएफ को कवर करने के लिए उपनिरीक्षक दीपक तोमर के नेतृत्त्व में एक टीम लगी। एसपी अंकुर अग्ग्रवाल ने बताया कि पांचों टीमें बुधवार रात से ही अलर्ट पर रहीं।
बृहस्पतिवार को हरदोई से टीमें लगातार मूवमेंट पर नजर रख रही थीं। इसी बीच पिसावां के दूल्हापुर तिराहे के पास आरोपी ट्रेस हो गए। हालांकि उनकी पहचान उस समय क्लीयर नहीं थी। संदिग्ध मानकर उन्हें रुकने का इशारा किया गया। इसके बाद संजय व राजू ने पुलिसकर्मियों पर फायर झोंक दिए। करीब दो राउंड फायरिंग हुई। इसके बाद दोनों भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।