जानकार बताते हैं कि कार्यवाहक मुख्य सचिव की नियुक्ति से यह बात स्पष्ट हो गई है कि राज्य में कार्यरत जिन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को इस पद का दावेदार माना जा रहा था, फिलहाल उनमें से कोई भी मुख्यमंत्री की कसौटी पर खरा नहीं उतरा है। सरकार पहले भी बेहतर विकल्प पर कनिष्ठ अफसरों को मुख्य सचिव बनाती रही है।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में से किसी को नियमित मुख्य सचिव बनाने पर विचार कर रही है। इनमें 1984 बैच के आईएएस अधिकारी व शहरी विकास मंत्रालय में सचिव दुर्गाशंकर मिश्र तथा कृषि कल्याण मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल के अलावा 1985 बैच की आईएएस व पंचायतीराज मंत्रालय में अपर सचिव शालिनी प्रसाद का नाम शामिल है।
1982 बैच व यूपी काडर के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार श्रीवास्तव भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। लेकिन उनका कार्यकाल केवल जनवरी 2020 तक बाकी है। बेहतर विकल्प के बावजूद केवल पांच माह का कार्यकाल बाकी होने से उन्हें इस पद की होड़ में नहीं माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार की ओर से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत इन अधिकारियों में से पसंद के अधिकारी को प्रदेश की सेवा के लिए वापस करने का पत्र भेज दिया गया है।