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धरना स्थल की सजा भुगत रही राजधानी, कौन जिम्मेदार?

Sun, 22 Sep 2013 01:51 AM IST
दीप सिंह/लखनऊ
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डॉ. राम मनोहर लोहिया, नानाजी देशमुख, चौधरी चरण सिंह सहित ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने लखनऊ में विधान भवन के सामने इसी धरना स्थल पर प्रदर्शन किया जहां आज है।
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हालांकि यह धरना स्थल तो और भी पुराना है। आजादी से पहले यहां अंग्रेजों केखिलाफ भी धरने हुए। लेकिन देश की आजादी केसमय शहर की आबादी चार लाख से भी कम थी।

आज यह 40 लाख पहुंच गई है। आबादी 10 गुना बढ़ गई। सभी रास्तों को जोड़ने वाले इस व्यस्ततम मार्ग पर जरा भी रुकावट हुई तो आधे से ज्यादा शहर रुक जाता है।

धरना देने वाले कुछ लोग अपनी मांगों केलिए सड़क पर आते हैं लेकिन भुगतते हैं स्कूली बच्चे, महिलाएं, मरीज और आम लोग। जिनका कोई दोष नहीं। कई बार तो यहां तक होता है कि जाम की वजह से मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाता और उसकी मौत हो जाती है।

धरना देने वालों में शामिल कुछ उपद्रवी तो महिलाओं और बच्चों से अभद्रता करने से भी नहीं चूकते। ऐसे में बार-बार यही सवाल उठता है कि चंद लोगों की वजह से पूरा शहर क्यों भुगते? इन्हीं सवालों पर शहर के जिम्मेदार लोगों से बात की गई तो कई विकल्प सामने आए और सुझाव भी।
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ऐसे ही सवालों के बीच धरना स्थल को कई बाद बदला भी गया। पिछली ही सरकार में तीन जगहों पर धरना स्थल स्थानांतरित किया गया। उसके बाद नई सरकार बनते ही कुछ लोगों की मांग पर फिर धरना स्थल वापस विधान भवन के सामने कर दिया गया लेकिन आम जनता की तकलीफ का विकल्प किसी ने नहीं सोचा।



हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। यह सुझाव भी आया कि एक सीमित संख्या में ही धरने को यहां अनुमति दी जाएगी। यह प्रशासन तय करेगा कि कितनी संख्या होने पर अनुमति दी जाए ताकि यातायात बाधित न हो लेकिन आए दिन सड़क जाम होती है, लोग तकलीफ सहते हैं। शहर की 40 लाख आबादी की मुसीबत का कोई हल नहीं निकल रहा।

ये हो सकते हैं विकल्प
1.झूलेलाल वाटिका, 2.गोमती किनारे कोई भी नया स्थान, 3.प्रतीकात्मक तौर पर विधान भवन केसामने और ज्यादा संख्या होने पर कोई दूसरा स्थान, 4. विधान भवन ही स्थानांतरित कर दिया जाए, 5.विधान सभा मार्ग का कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए, 6. जीपीओ पार्क या धरना स्थल को ही और विस्तार दे दिया जाए ताकि सड़क पर प्रदर्शनकारी न आएं।

पिछली सरकार में धरना स्थल का सफर
1.विधान भवन केसामने से शहीद स्मारक
2.शहीद स्मारक से ज्योतिबा फुले पार्क, चौक
3.ज्योतिबा फुले पार्क से झूलेलाल वाटिका
4.झूलेलाल वाटिका से फिर विधान भवन के सामने

सरकार धरना स्थल बदल दे तो हम तैयार
हम खुद इस बात को महसूस करते हैं कि आम जनता को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। धरना स्थल तो सरकार तय करती है। यदि दूसरी जगह सरकार धरना स्थल बना दे तो हम वहां धरना देने को तैयार हैं। हमें लोकतंत्र में अपनी समस्याओं के लिए धरना देने का अधिकार है लेकिन यह भी सही है कि अपने हक केलिए हम दूसरों का हक नहीं छीन सकते।
डॉ. आरपी मिश्र, प्रांतीय मंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट)

क्यों न विधान सभा ही हटा दी जाए
शिक्षकों की तकलीफ है तो लोकतंत्र में वह कहां जाएगा? विधान सभा ही ऐसी जगह है जहां धरना देकर वह अपनी बात कह सकता है। यदि इसकी वजह से किसी को तकलीफ होती है तो इसकेलिए सरकार जिम्मेदार है। शिक्षकों की समस्याओं को पहले ही हल कर दे तो धरना देने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। विधान सभा व्यस्त सड़क पर बनी है तो इसका एक ही विकल्प है कि उसे ही शहर से बाहर कर दिया जाए।
महेंद्र नाथ राय, प्रांतीय मंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ(चंदेल गुट)

सरकार चाहे तो बहुत से बहुत से विकल्प हैं
राजधानी के मेयर दिनेश शर्मा ने बताया कि निश्चित संख्या में प्रतीकात्मक धरना हो तब तो ठीक है, लेकिन बड़े धरनों के लिए दूसरा विकल्प होना चाहिए। जब यहां धरना स्थल बनाया गया था तब शहर की आबादी बहुत कम थी। आज विधानसभा मार्ग काफी व्यस्त हो गया है।

उन्होंने कहा कि शहर में बहुत से विकल्प हैं जहां धरना हो सकता है। गोमती किनारे कई जगह ऐसी हैं जहां नया धरना स्थल भी विकसित किया जा सकता है। सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए।
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