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प्रिंसिपल ने तीन साल में 11 बार की थी कैटरर की शिकायत

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राजकीय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में खराब खाने की आपूर्ति को लेकर उठे विरोध ने सरकारी संस्थाओं में चल रही ठेका-पट्टी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा दिए हैं।
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सवाल उठ रहे हैं कि जिस कैटरर्स मेसर्स कृष्णा इंटरप्राइजेज पर खराब खाना परोसे जाने का आरोप है, उसके खिलाफ पहले मिली शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
छात्राओं के बीमार होने के बाद समाज कल्याण विभाग ने जिस प्रधानाचार्या वंदना त्रिवेदी को निलंबित किया, उन्होंने खुद उक्त फर्म के खिलाफ तीन साल में करीब 11 शिकायतें कीं। इन पर विभागीय स्तर से क्या कार्रवाई हुई? किसी को पता नहीं।
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खास बात यह कि प्रधानाचार्या ने शनिवार को खराब खाना खाने से छात्राओं के बीमार होने के बाद खुद पुलिस में फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
यही नहीं, उन्होंने एफआईआर में ही बताया है कि फर्म को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन खाने की गुणवत्ता नहीं सुधरी। इसीलिए छात्राएं बीमार हुईं।
उन्होंने इस संबंध में उच्चाधिकारियों को किए गए पत्राचार की 11 शिकायतों की तारीख व पत्रांक संख्या भी एफआईआर में दर्ज कराई है।
उन्होंने इसका भी जिक्र किया है कि शिकायतों के बीच जिला समाज कल्याण अधिकारी ने भी उक्त फर्म को नोटिस दिया था। इसके बावजूद फर्म काम करती रही।
बताया जा रहा है कि फर्म का अनुबंध कुछ महीने पहले ही खत्म हुआ था। उम्मीद थी कि अब किसी अन्य फर्म को काम मिलेगा, लेकिन कृष्णा इंटरप्राइजेज का ही नवीनीकरण कर दिया गया।
उक्त फर्म ज्योतिबा फुले व एक अन्य विद्यालय में भी बच्चों को खाना आपूर्ति करती है। हालांकि उस दिन किसी अन्य विद्यालय में बच्चे की तबीयत नहीं बिगड़ी। कहा जा रहा है कि आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में आए खाने में ही कुछ गड़बड़ी थी।
इन तारीखों में हुईं शिकायतें
पत्रांक संख्या 114 द्वारा 28 अप्रैल 2018, पत्रांक संख्या 1004 द्वारा 20 नवंबर, 2018, पत्रांक संख्या 1114-16 द्वारा 22 दिसंबर, 2018, पत्रांक संख्या 841-43 द्वारा 16 सितंबर, 2019, पत्रांक संख्या 1049-52 द्वारा 17 अक्तूबर, 2019, पत्रांक संख्या 1042-44 द्वारा 17 अक्तूबर, 2019, पत्रांक संख्या 754-56 द्वारा 3 सितंबर, 2019, पत्रांक संख्या 1045-48 द्वारा 17 अक्तूबर, 2019, पत्रांक संख्या 1639-40 द्वारा 10 फरवरी, 2020, पत्रांक संख्या 460-62 द्वारा 28 अगस्त, 2021, पत्रांक संख्या 480-83 द्वारा 1 सितम्बर, 2021।
जानकारी में नहीं है कि प्रिंसिपल ने कोई पत्र लिखा। अच्छा खाना देना प्रिंसिपल व वार्डन की जिम्मेदारी है। छात्राओं के साथ एक शिक्षक भी खाना खाएगा, इसकी भी व्यवस्था है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा था। बाकी यदि प्रिंसिपल ने खाने की गुणवत्ता ठीक न होने के बारे में पत्र अधिकारियों को भेजे थे, तो इसकी जांच कराई जाएगी और कार्रवाई होगी।
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- राकेश कुमार, निदेशक, समाज कल्याण
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