रामकोट (सीतापुर)। थाना क्षेत्र में एक मंदिर के पुजारी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। सोमवार को उसका शव मंदिर परिसर में खून से लथपथ पड़ा था। पुलिस ने मौके से कई साक्ष्य जुटाए हैं। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से नमूने लिए हैं।
कस्बे में रामेश्वरम तीर्थ मंदिर काफी पुराना है। सोमवार को यहां के पुजारी हिमांशु मिश्रा उर्फ शंकुल (38) का शव मंदिर परिसर में बने बरामदे में खून से लथपथ पड़ा मिला। गर्दन सहित शरीर के कई अंगों पर धारदार हथियार से हुए हमले के निशान थे। मंदिर के अंदर पूजा का सामान भी बिखरा हुआ पड़ा था। देखने से ऐसा लग रहा था कि हत्यारों से पुजारी का काफी संघर्ष हुआ।
ग्रामीणों ने बताया कि शंकुल एक हफ्ते से मंदिर पर दिखाई नहीं दिए थे। मां ऊषारानी ने बताया कि शंकुल बीते दिनों 84 कोसी परिक्रमा करने गए थे, जहां से रविवार देर रात वह वापस आए थे। सुबह जब पूजा करने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे तो उन्होंने शव पड़ा देखा।
जानकारी मिलते ही एसपी चक्रेश मिश्र संग पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने बताया कि शंकुल की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। वह पांच साल से मंदिर में पूजा कर रहा था। सीओ सिटी अमन सिंह ने बताया कि धारदार हथियार से हमलाकर पुजारी की हत्या की गई है। वारदात के खुलासे के लिए पुलिस की कई टीमों को लगाया गया है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
शाहजहांपुर में है पैतृक गांव, पांच साल से कर रहा था सेवादारी
शंकुल का पैतृक गांव शाहजहांपुर जिले में है। वहां उसके पिता विश्व मोहन उर्फ मुलई रहते थे। रामकोट में मुलई की ननिहाल थी। इसलिए करीब 45 वर्ष पहले पूरा परिवार रामकोट चला आया था। शंकुल का जन्म भी रामकोट कस्बे में ही हुआ था। पांच साल से वह मंदिर की सेवादारी करता था। इससे पहले उसके पिता सेवादारी करते थे।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए नमूने, क्राइम ब्रांच भी जुटी
घटना के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच को लगाया गया है। थाने की भी टीम लगाई गई है। परिजनों का कहना है कि उसके पुत्र की किसी से कोई रंजिश नहीं थी। वहीं फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।