लखनऊ की निजी पैथोलॉजी और सरकारी अस्पतालों में कोरोना जांच की अलग-अलग रिपोर्टों से मरीज भ्रमित हो रहे हैं। नया मामला निरालानगर निवासी गर्भवती महिला का सामने आया है। उसकी निजी पैथोलॉजी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि लोहिया संस्थान की रिपोर्ट में कोविड निगेटिव पाया गया। ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर महिला इंदिरानगर स्थित निजी अस्पताल पहुंची। यहां कोविड 19 की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद लोहिया संस्थान ने दोबारा जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। ऐसे में 24 घंटे पहले जिस महिला का इलाज पॉजिटिव केस के रूप में हो रहा था उसे फिर से सामान्य की तरह इलाज दिया जाना शुरू किया गया। परिजन का आरोप है कि निजी पैथोलॉजी की गड़बड़ी से करीब 48 घंटे मानसिक तनाव झेलना पड़ा। इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।
पहले भी आया ऐसा मामला
सैनिक विहार कॉलोनी निवासी छात्रा की रिपोर्ट निजी पैथोलॉजी ने पॉजिटिव बताई थी, लेकिन केजीएमयू की जांच में वह निगेटिव पाई गई थी। उसे दो दिन तक अस्पताल में भी रखा गया था। इस मामले में सीएमओ ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन कुछ दिन बाद इसे रफा-दफा कर दिया गया।
शिकायत पर कराएंगे जांच
महिला के परिजन शिकायत करते हैं तो मामले की जांच कराई जाएगी। पैथोलॉजी से पता किया जाएगा कि ऐसा किन परिस्थितियों में हुआ। -डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
एक से दो प्रतिशत केस में अंतर की संभावना
जांच की अलग-अलग विधि अपनाई जा रही है। ऐसे में एक से दो प्रतिशत केस में अंतर की संभावना रहती है। यही वजह है कि ट्रूनेट की जांच के बाद पीसीआर टेस्ट भी कराया जाता है। इसे फाइनल रिपोर्ट के रूप में देखा जाता है। संभव है कि निजी पैथोलॉजी ने ट्रूनेट से जांच की हो। इसी तरह सैंपल लेते वक्त असावधानी का भी असर रिपोर्ट पर पड़ता है। यदि सैंपल लेने में चूक हुई तो पॉजिटिव होने के बाद भी रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है। - डॉ. उज्ज्वला घोषाल, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी, पीजीआई