महीने के अंत तक चुने जाने वाली सलाहकार फर्म को योजना बनाने और डीपीआर तैयार कर देने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। यह डीपीआर 30 जून 2021 तक बनकर तैयार हो जाएगी। इसके बाद एलडीए शासन और एनजीटी से भी योजना के विकास पर अनुमति लेगा।
टाउनशिप में विकास कार्य और अवस्थापना सुविधाओं के लिए जगह तय करने के लिए टॉपोलॉजिकल सर्वे भी प्राधिकरण सलाहकार के चयन के साथ शुरू कर रहा है। इसके लिए भी अलग से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
ईसीबीसी को समझें
ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण हितैषी निर्माण कार्यों जैसे ग्रुप हाउसिंग के लिए केंद्र सरकार ने एनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड (ईसीबीसी) नियम बनाए हैं। वर्ष 2007 में बने इस कोड में बदलाव किए गए हैं। इसमें ऊर्जा के न्यूनतम उपयोग से लेकर परंपरागत निर्माण के तरीके बदलने के लिए निर्देश दिए जाते हैं। एलडीए ने बहुमंजिला इमारतों में प्रधानमंत्री आवास से इसकी शुरूआत की। टाउनशिप में इसे लागू कर कार्य कराने पर एलडीए काम कर रहा है।
- ऊर्जा का प्रति वर्गमीटर उपयोग, पावर इंडेक्स को न्यूनतम रखा जाएगा। - पानी के उपयोग के बराबर भूगर्भ जल रिचार्ज क्षमता होगी। - शून्य कचरा नीति में सीवरेज और सॉलिड वेस्ट का पूरी तरह निस्तारण। - शोधित किए गए पानी का दोबारा से उपयोग होगा।
प्रबंधनगर योजना का विकास पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर होगा। यह मॉडल टाउनशिप की तरह विकसित होगी, जिससे भविष्य की योजनाओं में इसके अनुभव उपयोग किए जा सकें। इस टाउनशिप से कार्बन उत्सर्जन भी शून्य रखने का प्रयास होगा। - इंदुशेखर सिंह, मुख्य अभियंता, लखनऊ विकास प्राधिकरण