इस प्रतियोगिता मेें विजेता टीम के रूप में करन इनाम के तौर पर चौदह हजार रुपए लेकर आए। इसे देखकर सीमा और भोला की खुशी का ठिकाना न था, क्योंकि ये राशि उनके घर को चलाने के लिए तीन माह के खर्च के बराबर थी। पिता भोला कहते हैं कि हमने अपने बच्चों को कभी खेलने से नहीं रोका।
करन की तरह मुस्कान भी कई बड़ी प्रतियोगिताओं खेल चुकी हैं और अब ऋतिक और मान भी अपने बड़े भाई- बहन की तरह परिवार का नाम रोशन करेंगे। इस बच्चों की मां सीमा बतातीं है कि हमने कभी नहीं सोचा था कि बच्चे हॉकी खेलेंगे।
एक बार यहां के कोच राशिद ने हमसे अपने बड़े बेटे करन को भेजने को कहा। बड़े भाई को खेलते देख मुस्कान, ऋतिक और मान खुद ही वहां खेलने लगे। चारों बच्चे बहुत अच्छे है। हॉकी ट्रेनिंग के साथ पढ़ाई के अलावा दुकान मेें भी समय देते हैं।
आर्थिक तंगी से जूझने के बावजूद भोला और आरती ने कभी अपने बच्चों को हॉकी ट्रेनिंग करने से नहीं रोका। करन और मुस्कान बहुत प्रतिभावान खिलाड़ी है। इस समय अगर दोनों का एडमिशन हॉकी हॉस्टल में हो जाता है तो उनका कॅरिअर संवर सकता है।’- मो. राशिद, साई हॉकी कोच