लखनऊ। अधिक मुनाफे के लिए कुछ सब्जियों के कुछ व्यापारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। दुबग्गा सब्जी मंडी में लाल रंग से रंगे आलू की बिक्री की जा रही थी। खाद्य एवं औषधि (एफएसडीए) की टीम ने रविवार को छापा मारकर 23 क्विंटल आलू जब्त किए। व्यापारी को नोटिस जारी कर नमूने को जांच के लिए लैब भेजा गया है।
सहायक खाद्य आयुक्त विजय प्रताप सिंह ने बताया कि शिकायत मिली थी कि आलू को लाल रंग से रंगकर ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है। जांच के लिए कई अलग-अलग सब्जी मंडियों में छापा मारा गया। थोक की दुकानों पर आलू समेत अन्य सब्जियों की जांच की गई। इस दौरान मुनीर अहमद की दुकान से आलू का नमूना फौरी तौर पर चेक किया गया, जिसमें रंग की पुष्टि हुई। वहां पूरा स्टॉक सीज कर दिया गया। सहायक आयुक्त ने बताया कि आलू रंगने में किस प्रकार के रंग का इस्तेमाल किया गया है, इसकी जांच के लिए आलू के नमूने को प्रयोगशाला भेजा गया है। मुनीर को नोटिस जारी कर दुकान बंद करवा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दुकानदार के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सीतापुर रोड स्थित नवीन सब्जी मंडी और चिनहट स्थित कोल्ड स्टोरेज का भी टीम ने निरीक्षण किया, जहां सबकुछ ठीक पाया गया।
2.93 लाख रुपये का देसी घी जब्त
एफएसडीए की टीम ने कमला नेहरू रोड स्थित न्यू शक्ति देसी घी स्टोर पर जांच की। यहां घी की गुणवत्ता में कमी की आशंका हुई। टीम ने नमूने लेकर जांच के लिए भेजा। 2 लाख 93 हजार रुपये की कीमत का 435 लीटर घी सीज कर दिया। इसके अलावा कई अन्य प्रतिष्ठानों से बीस खाद्य सामग्री के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
पानी डालते ही रंग गए हाथ
एफएसडीए की टीम पहुंचते ही दुकान पर अफरातफरी मच गई। पहले तो दुकानदार भाग निकला। जब अफसरों ने उनको बुलाया तब वह वापस आए। जांच के दौरान टीम ने आलू को जब पानी से धोया तो उनके हाथ रंग गए। अंदाजा लगाया जा सकता है कि रंग का कितना अधिक इस्तेमाल किया गया।
मैनेज करने दफ्तर पहुंच गया दुकानदार
कार्रवाई करने के बाद टीम अन्य दुकानों पर जांच करने गई इस बीच आलू को रंग कर बेचने वाला दुकानदार एफएसडीए के दफ्तर पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक वह पूरे मामले को मैनेज करने के प्रयास में था, लेकिन अफसर ने उसको वहां से फटकार कर भगा दिया।
लंबे समय से कर रहा था खेल
शुरुआती जांच में सामने आया है कि दुकानदार काफी समय से आलू पर रंग चढ़ा कर ऊंचे दाम पर बेच रहा था। अंदेशा है कि कुछ और दुकानदार भी ऐसा ही कर रहे हैं। इसलिए टीम आगे भी इस तरह की जांच पड़ताल जारी रखेगी।
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आलू को लाल रंग से रंगकर बेचने का ये कोई नया मामला नहीं। इसके पहले भी एफएसडीए ने प्रदेश के कई जिलों में इस तरह के आलू जब्त किए हैं। विभाग के लोगों के अनुसार आलू को रंगने में अमूमन रेड-40 नाम की डाई का इस्तेमाल होता है। कुछ रिसर्च कहती हैं कि रेड-40 के कण शरीर के अंदर जाकर बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर पैदा करने के कारक बनते हैैं।
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अच्छे आलू की ऐसे करें पहचान
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के मुताबिक लाल आलू को खरीदने से पहले उसे हाथ में लेकर थोड़ा मसलें। यदि हाथ में लाल रंग लगे तो समझ जाएं कि उसे रंगा गया है। इसके अलावा जिन आलू के ऊपर हरी रंगत हो, या फिर उसमें हल्की तीखी गंध महसूस हो तो ऐसे आलू भी न खरीदें क्योंकि ये केमिकल से पकाए हुए आलू हो सकते हैं।
खतरनाक है लाल रंगा हुआ आलू
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि अभी तक आयरन ऑक्साइड केमिकल से आलू रंगे जाने की बात सामने आती रही है। यदि यही केमिकल है तो यह खतरनाक है। इस केमिकल का इस्तेमाल पेंट, सिरेमिक और कॉस्मेटिक्स में होता है। कोल्ड स्टोरेज से निकालने के बाद इसे रंगा जाता है। इससे रंगे आलू को खाने से शरीर में यह धातु जा सकती है। इससे गुर्दे और लिवर को नुकसान पहुंचता है। बाजार में लाल आलू की मांग ज्यादा रहती है, इस वजह से कुछ व्यापारी ज्यादा लाभ के लालच में सफेद आलू को रंग देते हैं। यह पांच से 20 रुपये तक ज्यादा कीमत पर बिक जाता है।
किडनी और लिवर पर पड़ता है असर
रंगों में कई प्रकार के घातक रसायन और धातुएं होती हैं। इनकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान किडनी और लिवर को पहुंचता है। इसके अलावा भी रंगी हुई सब्जियां शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
-डॉ. डी. हिमांशु, केजीएमयू
आलू के नमूने सील करते अधिकारी एवं बोरी जिसमें रखा था रंगा हुआ आलू।