बात 1992 की है। देवरिया के रामकोला के गन्ना किसान बकाया पैसा नहीं मिलने से परेशान थे। गुस्साए किसानों ने इसके विरोध में आंदोलन कर दिया। पुलिस ने आंदोलन कर रहे किसानों पर गोली चला दी, जिससे कुछ की मौत हो गई। कई घायल भी हुए।
23 सितंबर को मुलायम सिंह ने एलान किया कि अगर सरकार किसानों का हक नहीं देती है और दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं करती है तो सत्याग्रह किया जाएगा। इससे परेशान भाजपा सरकार ने देवरिया में नेताओं के दौरे पर रोक लगा दी। मुलायम सिंह कुछ साथियों के साथ 7-8 अक्तूबर की दरमियानी रात देवरिया के लोकनिर्माण विभाग के डाक बंगले पहुंच गए।
आधी रात के बाद पुलिस ने भवन को चारों तरफ से घेर लिया और रात में ही सबको वाराणसी सेंट्रल जेल भेज दिया। आखिर सरकार ने 14 अक्तूबर को सभी को बिना शर्त रिहा कर दिया। बहरहाल साल विदा होने को आ गया। पर, विदा होते-होते भी यह साल 1993 में होने वाले विधानसभा के मध्यावधि चुनाव का भाग्य लिख रहा था।
4-5 नवंबर को मुलायम सिंह के नेतृत्व में लखनऊ के बेगम हजरतमहल पार्क में सम्मेलन हुआ। इसी सम्मेलन में समाजवादी पार्टी का जन्म हुआ। 1993 में बसपा के साथ गठबंधन करके मुलायम सिंह ने सरकार बनाई और दोबारा मुख्यमंत्री बने।