मेरठ के खरखौंदा मामले में आला अफसरों के जो बयान आ रहे हैं, वह कमोबेश पीड़ित युवती के दावों को गलत साबित करने वाले हैं।
अभी तक की पड़ताल में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार भी करा है, पर पीड़िता के पक्ष की ओर से जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें गलत भी बताया जा रहा है।
शुक्रवार को केंद्र को भेजी रिपोर्ट में युवती के अपहरण की बात को नकार दिया गया। इससे पहले आला अफसर युवती के साथ दुराचार की बात को नकारते रहे।
सिर्फ एक अधिकारी ने युवती के साथ दुराचार होने की पुष्टि की जबकि बाकी के अफसर मेडिकल रिपोर्ट की दुहाई देकर इस आरोप को गलत बताते रहे।
पुलिस ने कहा, अपहरण ही नहीं हुआ
अब उसके अपहरण की बात को गलत बताते हुए यह बताया जा रहा है कि जिस दौरान अपहरण का आरोप है उस समय वह मेरठ के मेडिकल कालेज में ऑपरेशन कराकर भर्ती थी।
ऐसे ही यह बताया गया कि धर्मांतरण को लेकर जो नोटराइज्ड एफिडेविट पेश किया गया वह फर्जी निकला।
धर्मांतरण हुआ या नहीं इस पर पहले तो एडीजी कानून-व्यवस्था मुकल गोयल से लेकर आईजी मेरठ आलोक शर्मा का यही बयान था कि धर्मांतरण की बात सही है। अब गृह सचिव कमल सक्सेना ने कहा कि इसकी अभी जांच हो रही है।
दिया जांच चलने का हवाला
गृह सचिव से जब पूछा गया कि अगर धर्मांतरण हुआ है तो फर्जी एफिडेविट क्यों बनवाया गया। इस पर उनका कहना था कि पड़ताल में सामने आया है कि कुछ समय पहले युवती कुछ लोगों के साथ मदरसे में रुकने के लिए गई थी, पर वहां दूसरे धर्म का होने की वजह से रात में रुकने की अनुमति नहीं दी गई, इसी वजह से फर्जी एफिडेविट बनवाया गया।
युवती मदरसे में क्यों रुकने गई थी और इस बात का उसका धर्मांतरण हुआ या नहीं के सवाल से क्या ताल्लुक है, का गृह सचिव जवाब नहीं दे सके। उन्होंने इतना जरूर कहा कि चूंकि मामले की जांच मेरठ में हो रही है इसलिए तमाम तथ्य यहां पता नहीं चल पाते हैं। वह इतना ही कह सकते हैं कि अभी इसकी जांच चल रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें ऐसा नहीं लगता कि अभी तक जितनी भी जानकारी दी गई, उसमें पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत साबित करने कोशिश की गई। इस पर वह बोले कि जितना पता चलता है, बता दिया जाता है।