निजी ऑडिट एजेंसी की जांच में हुआ खुलासा
प्रियांक के मुताबिक, बैंककर्मियों ने मिलीभगत कर उनके नाम से खोले गए खाते को एनपीए करार दे दिया था जिसके बाद उन्हें फर्जीवाडे़ का पता चला। सच्चाई सामने आने पर प्रियांक ने बैंक अधिकारियों से दस्तावेज मांगे जो उन्हें नहीं दिए गए थे। आरटीआई लगाने पर अधूरे दस्तावेज सौंपे गए जिनकी जांच प्रियांक ने निजी ऑडिट एजेंसी से कराई थी। एजेंसी की रिपोर्ट में भी बैंक की खामी सामने आई थी। इसे आधार बनाते हुए प्रियांक ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में शिकायत करते हुए पीएनबी बैंक मैनेजर और अधिकारियों के पास मौजूद दस्तावेज दिलाने के लिए कहा था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कारोबारी व पुलिस को किया गुमराह
बैंक के अधिकारियों का फर्जीवाड़ा सामने आया तो बचने का कोई रास्ता नहीं दिखा। इसके बाद बैंक के आरोपी अधिकारियों ने कारोबारी को गुमराह करने के लिए पहले तो दस्तावेज के रिकॉर्ड नहीं उपलब्ध कराए। इसके बाद दबाव बना तो जो दस्तावेज दिए वे भी अधूरे दिए। वहीं पुलिस ने भी अपनी शुरुआती जांच के लिए बैंक अधिकारियों से दस्तावेज मांगे तो उनको भी गुमराह किया। प्रियांक के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने फर्जी अकाउंट खोलने के बाद उसे एनपीए करार दिए जाने की वजह से प्रियांक को लोन हासिल करने में दिक्कत आने लगी। प्रियांक के अनुसार, बैंक कर्मियों ने मिलीभगत कर फर्जी अकाउंट का संचालन भी खुद ही किया था।
पीड़ित के अनुसार, 14 करोड़ रुपये का हेरफेर होने की बात पता चलने पर उन्होंने डीसीपी पूर्वी अमित आनंद से मुलाकात कर जानकारी दी थी। उनके निर्देश पर गोमतीनगर थाने में बैंक अधिकारियों तरुण दास, पवन सिंह, शम्मी भसीन, हरीश जुनेजा और पुनित मिश्रा के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, साजिश रचने, अमानत में ख्यानत करने सहित कई संगीन धाराओं में केस दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक केशव कुमार तिवारी के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।