श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या राममंदिर आंदोलन से जुड़े नायकों का दस्तावेजीकरण करेगा। पुस्तक के रूप में प्रकाशित होने वाले इस दस्तावेज में आंदोलन के नायकों के योगदान और व्यक्तित्व का प्रकाशन किया जाएगा। इसको लेकर काम शुरू हो चुका है।
मंदिर आंदोलन के अधिकतर नायक दिवंगत हो चुके हैं। इनसे जुड़ी सूचनाओं का संकलन किया जा रहा है। मंदिर आंदोलन की प्रमुख धुरी रहे अशोक सिंहल, रामचंद्र दास परमहंस, गोरक्षपीठ के महंत रहे अवैद्यनाथ समेत अन्य महानायकों के त्याग, संघर्ष व बलिदान का प्रतिफल रहा कि वर्षों की कल्पना राममंदिर के रूप में मूर्त रूप ले रही है।
ये भी पढ़ें - लोकसभा चुनाव 2024 : क्षेत्रवार दलित जातियों को जोड़ने का अभियान चलाएगी भाजपा, किए जाएंगे दलित सम्मेलन
ये भी पढ़ें - बड़ी खबर: लोकसभा चुनाव में वरुण और मेनका दोनों को टिकट नहीं देगी भाजपा, इन चेहरों पर लगा सकती है दांव
इसके अलावा जगद्गुरू पुरुषोत्तमाचार्य, आचार्य गिरिराज किशोर, जगद्गुरु माधवाचार्य, जगद्गुरु शिवरामाचार्य, ओंकार भावे, महेश नारायण सिंह, डॉ. विश्वनाथ दास शास्त्री समेत कई ऐसी हस्तियों का इतिहास प्रकाशित किया जाएगा, जिन्होंने मंदिर आंदोलन से न केवल जन-जन को जोड़ा, बल्कि इसे आजादी के बाद का सबसे बड़ा आंदोलन बना दिया।
इन नायकों के संघर्ष की गाथा जन-जन जान सके, इसलिए इस योजना पर काम हो रहा है। मंदिर आंदोलन के अहम किरदार पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती कहते हैं कि मंदिर आंदोलन के नायकों का योगदान अमूल्य है। उनके संघर्ष की गाथा लोगों तक पहुंचाने और उन्हें सम्मान देने की योजना सराहनीय है। मंदिर परिसर में इनका स्मारक भी बनना चाहिए।
बलिदानियों का लगे शिलालेख : परमहंस आचार्य
राममंदिर निर्माण को लेकर आमरण अनशन कर चुके तपस्वी छावनी के पीठाधिपति जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र भेजा है। उन्होंने मांग की है कि श्रीराममंदिर आंदोलन के महानायक महंत अवैद्यनाथ, अशोक सिंहल, रामचंद्र परमहंस के नाम से प्रवेश द्वार बनाया जाए। साथ ही पांच सौ वर्षों में मंदिर आंदोलन के दौरान जिन रामभक्तों ने जान गंवाई है, उनके नाम का शिलालेख श्रीरामजन्मभूमि परिसर में लगाया जाए। इन्हीं बलिदानियों के संघर्ष का ही परिणाम है कि हम सभी मंदिर निर्माण के साक्षी बन रहे हैं।