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पीडियाट्रिक विभाग में उमड़ी भीड़, पहले दिन पहुंचे 315 मरीज

Fri, 30 Aug 2013 08:37 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के नए बाल रोग में पहले ही दिन से मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी।
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ओपीडी में पहले दिन 315 पर्चे बने। इनमें से 27 बच्चों को भर्ती कर लिया गया। अभी भी वार्ड के 23 बेड खाली रहे। इससे पहले पुराने भवन में बच्चों के लिए मात्र 30 बेड की ही व्यवस्था थी, जिससे मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता था।
रही अफरा-तफरी
सिविल अस्पताल में शुरू हुई पीडियाट्रिक विंग में बच्चों का इलाज शुरू हो गया। मेंटीनेंस का कार्य चलने के कारण थोड़ी अफरा-तफरी रही लेकिन इसके बावजूद पहले दिन ओपीडी में 315 पर्चे बनाए गए।
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अन्य मरीजों के साथ लाइन में लगकर पर्चा बनवाने से राहत मिलने से बच्चों के माता-पिता भी खुश दिखे। पहले ही दिन 27 बच्चों को भर्ती किया जा चुका था। वहीं डायरिया वार्ड के छह बेड फुल हो चुके थे।

चार बाल रोग विशेषज्ञ ओपीडी में तैनात थे। आलमबाग भोलाखेड़ा निवासी राजेश सिन्हा ने बताया कि वो अपने आठ वर्षीय बेटे अंजनी को बुखार और सिर में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाए थे।

जब अस्पताल के नए भवन पहुंचे तो बिलकुल चकित रह गए। सरकारी अस्पताल को जगमगाता देखकर अच्छा लगा। पुरानी ओपीडी और वार्ड के मुकाबले बहुत अच्छा है और बिना किसी परेशानी के आराम से इलाज मिल रहा है।

सदर निवासी रकाबुल ने बताया की दवा काउंटर अलग होने से भी मरीजों को अब भीड़ में परेशान नहीं होना पड़ रहा है। पर्चा बनवाने से लेकर दवा लेने तक में परेशानी नहीं हुई। वार्ड भी साफ-सुथरे थे।
कुछ कमियां भी हैं...पीडियाट्रिक विंग में स्ट्रेचर न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रोसीजर रूम से मरहम-पट्टी कराने के बाद कई अभिभावक बच्चों को गोद में उठाकर वार्ड तक ले गए। वहीं कई को वार्ड ब्वॉय की मदद से वार्ड तक पहुंचाया गया।
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इसके अलावा नए भवन में रैंप की सुविधा भी नहीं है। यहां तक कि लिफ्ट भी ऐसी नहीं है कि मरीजों को स्ट्रेचर सहित वार्ड तक पहुंचाया जा सके। इसके चलते बच्चों को गोद में ही सीढ़ियों या फिर लिफ्ट से सेकेंड और थर्ड फ्लोर के वार्ड तक पहुंचाया गया।
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