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Lucknow News: स्वार्थ रहित होना चाहिए भगवान के प्रति अनुराग

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लखनऊ। गोमतीनगर स्थित बौद्ध अंतरराष्ट्रीय संस्थान में चिन्मय मिशन की ओर से चल रहे मानस ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन स्वामी अद्वैतानंद ने कहा कि ईश्वर के प्रति स्वार्थ रहित अनुराग होना चाहिए। बाबा तुलसीदास जी ने भी इसकी व्याख्या की है।



स्वामी अद्वैतानंद ने कहा, हमारी भक्ति ज्यादातर सकारण ही होती है। कोई संपत्ति के लिए तो कोई संतान के लिए भगवान की पूजा करता है। कोई वैभव, शक्ति और अन्य स्वार्थ की वजह से पूजा करता है। छात्र-छात्राएं भी अच्छे अंक लाने के लिए भगवान को भोग लगाते हैं और प्रार्थना करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भक्ति की शुरुआत प्रेम से होती है और बिना विश्वास के प्रेम हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा, सूर्य और चंद्रमा भी पूरे विश्व के कल्याण के लिए विचरण करते हैं। इसी तरह से पूरी पृथ्वी शेषनाग पर टिकी है। समुद्र मंथन के दौरान कच्छप की भूमिका सबसे महत्वूपूर्ण थी। ये सभी स्वार्थ से परे विश्व कल्याण के लिए काम कर रहे हैं।
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स्वामी अद्वैतानंद ने कहा, प्रेम से बड़ा कोई रस नहीं हो सकता। प्रभु राम के नाम में सभी रसों का सार है, इसलिए श्रीराम का स्मरण करते रहिए। उन्होंने भगवान राम के चरित्र से शिक्षा लेने और उन शिक्षाओं को जीवन में उतारने का संदेश दिया। मौके पर स्वामी कौशिक चैतन्य जी, रमेश मेहता, रमाश्री अग्रवाल, श्रीकांत अरोड़ा, पंकज अग्रवाल, विनीत तिवारी और सुनील नौडियाल आदि थे।
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