डॉ. आदर्श त्रिपाठी व मनोवैज्ञानिक नेहा आनंद।
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डॉ. आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि मानसिक समस्याएं तो बढ़ ही रही हैं, वहीं इंटरनेट पर दिग्भ्रमित करने वाली सूचनाएं इसको और बढ़ा रही है। ये सूचनाएं इस तरह से पेश की जाती हैं कि बच्चे उसे ही सच मान लेते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी हरकतें करने लगते हैं। हां, ये अच्छी बात है कि उनका मकसद आत्महत्या करना नहीं, बल्कि खुद को चोटिल करना होता है। इससे मिला दर्द एक नशे की तरह काम करता है और लोग कुछ देर के लिए राहत महसूस करते हैं।
बच्चों को अकेला छोड़ने से बचें
डॉ. नेहा आनंद बताती हैं कि पैरासुसाइडल बिहैवियर के मामलों में ज्यादातर बच्चे हाथ और जांघ पर कट मारते हैं। ऐसा बच्चा कर रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को कुछ समय जरूर दें। उन्हें ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक कामों में व्यस्त करें। बच्चों को सुनना बहुत जरूरी है।