कोरोना संकट के बावजूद निजी अस्पताल मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि करीब एक हजार निजी अस्पतालों में से सिर्फ एक कोविड अस्पताल बनने को तैयार हुआ है। हालांकि, पांच निजी मेडिकल कॉलेज को बतौर कोविड हॉस्पिटल इस्तेमाल किया जा रहा है।
लखनऊ में कोरोना मरीजों का आंकड़ा जून में करीब दो सौ पार कर गया है। वहीं, सरकारी संस्थान फुल होने की कगार पर हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने एक माह पहले निजी अस्पतालों को कोविड अस्पताल में शामिल किए जाने के लिए पत्र भेजा था। हालांकि, केवल एक निजी अस्पताल का कोविड अस्पताल बनाए जाने के लिए पत्र आया है। निरीक्षण न किए जाने से अभी इसे कोविड अस्पताल नहीं बनाया जा सका है।
...इसलिए पीछे हट रहे निजी अस्पताल
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
कोविड अस्पताल बनने से निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों की भर्ती नहीं हो पाएगी, जिससे कमाई बंद हो जाएगी। वहीं, शासन के कड़े नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा निजी अस्पताल कोरोना जांच के पांच हजार रुपये वसूल रहे थे। शासन ने निजी सेंटर की जांच का रेट तय कर दिया है। कोविड अस्पताल बनने से आईसीयू से लेकर बेड चार्ज तक फिक्स हो जाएगा। राजधानी में करीब 975 निजी अस्पतालों में 12 हजार से अधिक बेड हैं।
निजी अस्पतालों को कोविड हॉस्पिटल बनाने के लिए पत्र भेजा गया था। महज एक ने हामी भरी है। अन्य अस्पताल भी खुद आगे आएंगे तो बेहतर रहेगा। -डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
कोविड में हालात बिगड़ने पर आईएमए के डॉक्टरों ने सेवाएं देने की बात कही है। अभी सरकारी अस्पताल में पर्याप्त बेड हैं। जरूरत पर निजी सेंटर आगे आएंगे। -डॉ. पीके गुप्ता, आईएमए पूर्व अध्यक्ष
कोविड अस्पताल बेड भर्ती मरीज
केजीएमयू 200 46
लोहिया संस्थान 100 60
लोकबंधु अस्पताल 100 72
पीजीआई कोविड 100 82
साढ़ामऊ अस्पताल 60 51
इंटीग्रल हॉस्पिटल 47 00
एरा मेडिकल कॉलेज 400 00
टीएसएम मेडिकल 220 00
कॉलेज
कैरियर डेंटल कॉलेज 520 00
ईएसआई हॉस्पिटल 100 37