चिनहट में पकड़े गए वाहन चोर गिरोह के सदस्य।
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गिरोह एक्सिडेंटल गाड़ियों की कीमत लगाने के बाद खेल शुरू करता था। गिरोह दुर्घटनाग्रस्त कार को इंश्योरेंस कंपनी के पास वैल्यू के लिए भेजता था। वैल्यू दो तरह से लगाई जाती है। एक पूरी तरह से निष्प्रयोज्य और दूसरी उस कार की हादसे में क्षतिग्रस्त होने के बाद कीमत। इसके बाद मालिक को एक निश्चित रकम ग्राहक से दिलाई जाती थी। वहीं, इंश्योरेंस कंपनी भी उसे डैमेज की भरपाई के लिए रुपये देती थी। इसके बाद गिरोह गाड़ी के सेल लेटर पर मालिक के दस्तखत करा लेता था। क्षतिग्रस्त गाड़ियों को गैराज में रखने के बाद उस तरह की गाड़ी चोरी करता था। इसके बाद गैराज में लाकर सप्ताहभर में क्षतिग्रस्त गाड़ी का चेसिस नंबर व इंजन नंबर चोरी की गई गाड़ी में लगा देता था।
इंश्योरेंस कंपनी व आरटीओ की भूमिका की जांच
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, गिरोह को बढ़ावा देने में निजी इंश्योरेंस कंपनियों व आरटीओ कर्मचारियों की भूमिका रही है। ऐसे संदिग्धों की सूची तैयार कर जांच शुरू कर दी गई है। बरामद गाड़ियों को असली मालिक को सुपुर्द किया जाएगा।
एडीसीपी पूर्वी अमित कुमार के मुताबिक, यह गिरोह क्षतिग्रस्त वाहनों को कागज सहित खरीदते थे। इसके बाद उसी मॉडल की गाड़ी ऑन डिमांड चोरी करते थे। गिरोह के सदस्य इतने शातिर हैं कि वह चेसिस व इंजन नंबर को आसानी से खरीदकर बदल देते थे। वाहनों के ईसीएम व आइडेंटिफिकेशन चिप भी बदल देते थे।
एसीपी विभूतिखंड स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक, 12 से अधिक स्थानों पर पुलिस टीम दबिश दे रही है। कुछ गाड़ियां बरामद हुई हैं। इसमें सीतापुर, जयपुर, मुरादाबाद, वाराणसी व दिल्ली से कई गाड़ियां बरामद हुई हैं। इसके अलावा पुलिस टीम बिहार, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के लिए भी गई हैं।
डीसीपी पूर्वी सोमेन वर्मा के मुताबिक, 15 जून को चिनहट पुलिस चेकिंग कर रही थी। इस दौरान आई-20 कार छोड़कर कुछ लोग भाग निकले। कार को लावारिस में दाखिल कर मालिक की तलाश शुरू की। ऑनलाइन चेक किया तो गाड़ी का मालिक कैसरबाग के सुंदरबाग निवासी नासिर खान निकला।
पुलिस के मुताबिक, एप पर कार का मॉडल 2013 दिखा रहा था जबकि कार 2019 की लग रही थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम भी शुरूआती जांच में फेल हो गई। दोबारा तीन घंटे तक जांच करने के बाद एफएसएल के अधिकारियों ने चेसिस नंबर व इंजन नंबर के बदलने की पुष्टि की।
पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक से पत्राचार कर रिपोर्ट हासिल की। डीसीपी पूर्वी के मुताबिक, जब सही चेसिस व इंजन नंबर की जांच की तो असली मालिक का पता चला। यह गाड़ी पांच जून को गोमतीनगर से चोरी हुई थी। इसका मुकदमा भी दर्ज था।
मीडिया को संबोधित करते लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय।
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डीसीपी ने बताया, आरोपियों ने कुबूला कि लॉकडाउन के कारण गाड़ियों को गैर प्रदेशों व नेपाल भेजने में असफल रहे। यह गिरोह नेपाल, बिहार, उत्तराखंड, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, नार्थ ईस्ट के प्रदेशों में ऑन डिमांड वाहन सप्लाई करता था। कमिश्नर ने गिरोह का खुलासा करने वाली टीम को 50 हजार रुपये का इनाम दिया है।
कश्मीर व नॉर्थ ईस्ट निशाने पर
एसीपी विभूतिखंड स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक, गिरोह कश्मीर व नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से आसानी से गाड़ी चोरी कर लेते थे। बताया, एक दो दिन के अंदर 50 से अधिक लग्जरी कारें और बरामद होंगी।
पहले मालिक से सीधे तीसरे को बेचते थे
एडीसीपी पूर्वी अमित कुमार के मुताबिक, गिरोह वाहन पहले मालिक से सीधे तीसरे को बेचता था। दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों के मालिक को इंश्योरेंस की रकम दिलाने के बाद वाहन को कबाड़ घोषित कर देते थे। रकम देते समय वाहन मालिक से सेल लेटर पर दस्तखत करवा लेते थे। इसके बाद चोरी की गाड़ी पर उसका चेसिस व इंजन नंबर सेट कर बेचते थे। इसमें एक बीच का भी ग्राहक होता था। जिससे गाड़ी की क्षतिग्रस्त होने के बाद कीमत लगवाई जाती थी। वाहन उसे नहीं बेचा जाता था। वह गिरोह का ही सदस्य होता था। रकम देने के बाद गाड़ी को एक सप्ताह में नए कलेवर में तैयार कर तीसरे ग्राहक को बेचा जाता था।