केजीएमयू ने मरीजों की समस्याओं को देखते हुए ऑनलाइन पंजीकरण के साथ ही ऑफलाइन पर्चे बनाने की व्यवस्था भी शुरू करने का फैसला किया है। अभी तक सिर्फ ऑनलाइन पंजीकरण ही हो रहा था। इसकी वजह से काफी मरीजों को रोज ओपीडी से वापस लौटना पड़ रहा था। अब ऑनलाइन के साथ ही मरीजों की मदद के लिए एक डेस्क खोली जा रही है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोविड के मामलों में कमी को देखते हुए ओपीडी में देखे जाने वाले मरीजों की अधिकतम सीमा में ढील दे दी है। अब सामान्य विभाग में रोजाना 250 और सुपर स्पेशिएलिटी विभाग में प्रतिदिन 150 मरीज देखे जा रहे हैं।
कोविड-19 टीके की दोनों डोज लगवाने वाले या फिर आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट वालों का पंजीकरण किया जा रहा है। मरीजों को समस्या न हो इसलिए अब लिफ्ट के पास ऑफलाइन पंजीकरण के लिए भी डेस्क लगाई गई है। हालांकि यहां भी टीके की दोनों डोज लगवा चुके या फिर आरटीपीसीआर की निगेटिव जांच रिपोर्ट दिखाने वालों का ही पंजीकरण किया जाएगा।
ऑफलाइन पंजीकरण के लिए सिर्फ एक काउंटर
केजीएमयू भले ही मरीजों की सुविधा के लिए ऑफलाइन व्यवस्था शुरू करने का दावा कर रहा है लेकिन यह प्रयास बहुत सफल होने की उम्मीद कम ही है। जितनी तादाद में रोजाना मरीज वापस किए जा रहे हैं, उस हिसाब से सिर्फ एक काउंटर लगाने से बात बनने वाली नहीं है।
इस समय सिर्फ केजीएमयू ही एकमात्र ऐसा संस्थान है, जहां ऑनलाइन पंजीकरण की अनिवार्यता है। बाकी सभी अस्पतालों में मौके पर ही पंजीकरण की सुविधा है। ऑनलाइन की अनिवार्यता होने की वजह से सुदूर क्षेत्र के काफी मरीज अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।