इस पर राज्यस्तरीय समिति ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को डीएम की रिपोर्ट में फर्जी बताया गया है, उनका नाम- पता, रिजल्ट की फोटो कॉपी और मोबाइल नंबर उसे उपलब्ध कराया जाए। इस कार्य के लिए संस्थानों को सप्ताह भर का समय दिया गया है।
समाज कल्याण विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि अगर सप्ताह भर में संतोषजनक जवाब देने में संस्थान प्रबंधन असफल रहा तो उन्हें काली सूची में डाला जाएगा। बता दें कि काली सूची में डालने पर संस्थान को अगले पांच साल तक योजना का लाभ नहीं दिया जाता है। इसकी सूचना भी छात्रवृत्ति के पोर्टल पर प्रदर्शित की जाती है।