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राममंदिर का एक तिहाई काम पूरा : दिसंबर 2023 तक तैयार हो जाएगा गर्भगृह, प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्त कर सकेंगे रामलला के दर्शन

Sat, 07 May 2022 07:40 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव संवाद न्यूज एजेंसी, अमर उजाला, अयोध्या

सार

राममंदिर की प्लिंथ (चबूतरा) का निर्माण कार्य जोरों पर है। सात लेयर में बनने वाली प्लिंथ की पांचवीं लेयर ढाली जा रही है। इसी प्लिंथ पर राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। प्लिंथ कर्नाटक व तेलंगाना के ग्रेनाइट पत्थरों से बन रही है।
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राममंदिर परिसर में जारी निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामभक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब तक राममंदिर का तीस प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बहुत जल्द ही मंदिर के गर्भगृह के नक्काशीदार पत्थरों को जोड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा। शनिवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मीडिया कर्मियों को राममंदिर का निर्माण कार्य दिखाया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि दिसंबर 2023 तक गर्भगृह तैयार हो जाएगा। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों को रामलला के दर्शन  होने लगेंगे। मंदिर निर्माण निर्धारित समय-सीमा के अनुसार ही चल रहा है।

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ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि अभी नींव के तीसरे चरण का काम चल रहा है। इसमें राममंदिर की प्लिंथ (चबूतरा) का निर्माण कार्य जोरों पर है। सात लेयर में बनने वाली प्लिंथ की पांचवीं लेयर ढाली जा रही है। इसी प्लिंथ पर राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। प्लिंथ कर्नाटक व तेलंगाना के ग्रेनाइट पत्थरों से बन रही है। शीघ्र ही प्लिंथ का काम पूरा होगा और राजस्थान के भरतपुर जनपद के वंशीपहाड़पुर के हल्के गुलाबी बलुआ नक्काशीदार पत्थरों को जोड़ने का काम शुरू हो जाएगा।

चंपत राय ने बताया कि दिसंबर 2023 तक पहली मंजिल, परिक्रमा पथ व पूरब में एक मंडप का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों को रामलला का दर्शन भी होने लगेगा। संपूर्ण मंदिर में लगभग 4.70 लाख घनफीट नक्काशीदार पत्थर लगेंगे। पत्थरों की आपूर्ति भी शुरू हो गई है। गर्भगृह में लगने वाले मकराना के सफेद संगमरमर पत्थरों की नक्काशी भी प्रगति पर है, ये पत्थर भी शीघ्र अयोध्या पहुंचने लगेंगे। चंपत राय ने बताया कि मिट्टी की कटान रोकने के लिए व मंदिर के पश्चिम में प्रवाहित सरयू के किसी भी संभावित आक्रमण को सहने के लिए मंदिर के पश्चिम, दक्षिण व उत्तर में रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य भी साथ-साथ चल रहा है। यह एक ऐतिहासिक कार्य है, भावी पीढ़ी इसे देश का निर्माण कहेगी।
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प्लिंथ में लगेंगे 6.37 लाख घनफीट पत्थर
महासचिव चंपत राय ने बताया कि अभी मंदिर की प्लिंथ को ऊंचा करने का काम चल रहा है। प्लिंथ भी 2.77  एकड़ में बन रही है। पांच फीट लंबे, ढाई फीट चौड़े व तीन फीट ऊंचे आकार के ग्रेनाइट के लगभग 17 हजार ब्लॉक प्लिंथ में लगेंगे। कुल 6.37 लाख घनफीट ग्रेनाइट का प्रयोग होगा। इसके पूर्व 1.5 मीटर ऊंचाई की नौ हजार घनमीटर राफ्ट चार माह में ढाली गई। राफ्ट का निर्माण अक्तूबर 2021 में पूरा हुआ। बताया कि राममंदिर की नींव एक हजार साल तक सुरक्षित रहेगी। पचास फीट गहरे गड्ढे को आरसीसी से भरा गया। दस इंच मोटी आरसीसी 48 परतों में ढाली गई। गर्भगृह में कुल 56 परतें ढाली गई हैं, यह संपूर्ण कार्य जनवरी 2021 से सितंबर 2021 तक हुआ।

नौ लाख घनफीट पत्थरों से बनेगा परकोटा
चंपत राय ने बताया कि राममंदिर की नींव की डिजाइन तैयार करने में देश के सर्वोत्तम इंजीनियरों की मदद ली गई है। देश की आठ नामी तकनीकी एजेंसियां मंदिर निर्माण के काम में सहयोग कर रही हैं। मंदिर का क्षेत्रफल लगभग 2.7 एकड़ है परंतु इसके चारों ओर आठ एकड़ भूखंड को अपने भीतर समाहित करते  हुआ एक आयताकार परकोटा बनेगा। यह परकोटा भी नौ लाख घनफीट पत्थरों से तैयार होगा। इस पर भी समानांतर कार्य चल रहा है।

प्लिंथ में लगाई जा रहीं रामशिलाएं
राममंदिर आंदोलन के दौरान 1989 में शुरू हुए शिलादान कार्यक्रम के तहत देश-विदेश से एकत्र की गई रामशिलाओं को भी राममंदिर की नींव में स्थापित किया जा रहा है। निर्माण प्रभारी गोपालजी ने बताया कि राममंदिर के प्लिंथ के किनारे-किनारे रामशिलाओं को भी स्थान दिया जा रहा है। शिलादान अभियान में भारत सहित विश्व के 55 देशों से रामशिलाएं एकत्र की गईं थीं जिन्हें रामघाट स्थित कार्यशाला में मंदिरनुमा आकृति में संरक्षित किया गया था। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद अब इन शिलाओं को रामजन्मभूमि परिसर में पहुंचा दिया गया है जहां राममंदिर निर्माण में इनका भी प्रयोग हो रहा है।
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