‘अमेरिका के सबसे अमीर एक प्रतिशत नागरिकों के पास देश की 38 प्रतिशत संपत्ति है, भारत में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत हो जाता है।
समस्या सिर्फ यह नहीं है कि एक प्रतिशत आबादी इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति व संपदा पर कब्जा किए हुए है, बल्कि वे इसे कब्जे में रखते हैं और अर्थव्यवस्था में सर्क्यूलेट ही नहीं होने देते।
अब इसका अर्थव्यवस्था में उपयोग होगा तो देश प्रगति करेगा, आधारभूत संरचनाएं विकसित होंगी, नौकरियां बढ़ेंगी और सभी नागरिकों का जीवन स्तर सुधरेगा।’
यह बात अमेरिकी प्रोफेसर और लोकतांत्रिक राजव्यवस्थाओं के विशेषज्ञ रिचर्ड विनफिल्ड ने बुधवार को लखनऊ में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन के साथ एक नागरिक सभा में साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में यह बात कही।
विनफील्ड ने बताया कि जैसी व्यवस्थाएं भारतीय और अमेरिकी लोकतंत्र ने तैयार की हैं, उनमें निजी क्षेत्र के जरिए विकास की बात सोची जा रही है। सीईओ और कर्मचारी के वेतन में 325 गुना तक का फासला देखने को मिलता है।
हालांकि अब अमेरिकी सरकार को लग रहा है कि नौकरियां देना, अपने नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर देना, उसका दायित्व है। उन्होंने कहा कि आज भी भारत और अमेरिका दोनों के लोकतंत्र में संपत्ति का अनियोजित बंटवारा ही बड़ी समस्या है।