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Lucknow News: डीएम गाजीपुर के आदेश पर नगर निगम ने अफजाल अंसारी की पत्नी को सौंपी डालीबाग कोठी की चाबी

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कोठी पर कब्जा लेने पहुंचे अफजाल अंसारी।
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लखनऊ। माफिया मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को पांच साल पहले कुर्क की गई डालीबाग स्थित कोठी बुधवार को वापस मिल गई। गाजीपुर के जिलाधिकारी के आदेश पर नगर निगम ने कोठी की चाबी अफजाल की पत्नी फरहत अंसारी को सौंप दी। करीब 6,700 वर्ग फीट में बनी इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 2.46 करोड़ रुपये है। यह कोठी डालीबाग के तिलक मार्ग के पास प्लॉट नंबर 14बी पर स्थित है।
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यह संपत्ति गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में कुर्क की गई थी। गाजीपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने 23 अक्तूबर 2022 को इसे बेनामी संपत्ति मानते हुए कुर्की का आदेश दिया था। कुर्की के बाद गाजीपुर जिलाधिकारी ने इसे देखरेख के लिए लखनऊ नगर निगम को सौंप दिया था। तब से यह कोठी नगर निगम के पास ही थी। अफजाल पर आरोप था कि उन्होंने संगठित अपराध से अर्जित धन से यह संपत्ति 1998 में पत्नी फरहत अंसारी के नाम लीज पर ली थी।
परिवार ने कुर्की के खिलाफ जिला जज कोर्ट और फिर एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में अपील की थी। स्पेशल कोर्ट ने 7 अप्रैल 2025 को कुर्की आदेश रद्द कर संपत्ति मुक्त करने का आदेश दिया। शासन ने इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी। उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त 2026 को पांच हफ्ते में मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया था। इसी क्रम में जिलाधिकारी गाजीपुर अनुपम शुक्ला ने 18 अगस्त को कुर्की समाप्त करने का आदेश जारी किया।
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इस आदेश की प्रति लखनऊ नगर आयुक्त को भेजी गई थी। इसके बाद बुधवार को नगर निगम ने कोठी की चाबी अफजाल अंसारी की पत्नी को सौंप दी। कब्जा सौंपते समय अफजाल और उनकी दो बेटियां भी मौजूद थीं। कब्जा दिलाने के लिए गाजीपुर जिला प्रशासन ने एक दरोगा भी भेजा था। नगर निगम के नायब तहसीलदार राजेंद्र कुमार ने बताया कि गाजीपुर जिलाधिकारी के आदेश के बाद कोठी का कब्जा फरहत अंसारी को सौंप दिया गया है।
गेट की बदली हुई स्थिति
जब कोठी सील की गई थी, तब उसका मुख्य गेट डालीबाग की ओर था। कोठी में दो अन्य गेट पीछे हैदर कैनाल बंधे की ओर भी हैं। करीब डेढ़ साल पहले पास में ही मुख्तार की जमीन थी। एलडीए ने उसे नजूल की जमीन मानते हुए कब्जा ले लिया था और वहां सरदार बल्लभ भाई पटेल आवासीय योजना लाया था, जिसमें 72 फ्लैट बने हैं। इस योजना की बाउंड्री के कारण कोठी का मुख्य गेट अब घिर गया है। ऐसे में बिना दीवार तोड़े मुख्य गेट से अंदर जाना संभव नहीं है। इसलिए बंधे वाली रोड के गेट से कब्जा दिया गया और वहां का मलबा भी साफ कराया गया।
अंसारी ने लगाया कोठी में चोरी का आरोप, प्रशासन ने नकारा
कोठी का गेट खोलकर जब लोग अंदर गए तो सामान बिखरा हुआ था। इस पर अफजाल अंसारी ने चोरी होने का आरोप लगा दिया। हालांकि, कोठी का कब्जा देने वाले नगर निगम के नायब तहसीलदार राजेंद्र कुमार ने बताया कि इस तरह की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। मौके पर इस तरह का आरोप नहीं लगाया गया। कब्जा देते समय कोई ताला टूटा भी नहीं था। वहीं, एसीपी हजरतगंज रजनीश कुमार ने भी किसी तरह की शिकायत न मिलने की बात कही है। यह भी कहा कि जब सीलिंग की कार्रवाई हुई थी, उस समय सामान निकालने के लिए पूरा मौका दिया गया था। कोठी की सुरक्षा को लेकर उनका एक गार्ड भी तैनात रहता था।

कोठी पर कब्जा लेने पहुंचे अफजाल अंसारी।

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