ओमप्रकाश राजभर के नजदीकी लोगों का कहना है कि भाजपा से गठबंधन का उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा। इसलिए अब किसी से गठबंधन के बजाय पिछड़ों व अति पिछड़ों की भलाई के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने रैली के दिन मंच से अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए सरकार से अलग होने का निश्चय कर लिया है।
लगातार जताते रहे हैं नाराजगी
भाजपा के साथ गठबंधन कर पहली बार विधायक बनने वाले ओमप्रकाश राजभर योगी सरकार में दिव्यांग कल्याण विभाग का कैबिनेट मंत्री बनने के बाद से ही लगातार नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। गाजीपुर के तत्कालीन डीएम रहे संजय कुमार खत्री के रवैये को लेकर भी उन्होंने बगावती तेवर दिखाए थे। पिछड़ों को मिल रहे 27 प्रतिशत आरक्षण में तीन श्रेणियां बनाकर इसका लाभ पिछड़ों के बीच बांटने के सवाल को लेकर भी मुखर रहे हैं। मंत्री होते हुए भी उन्होंने सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा।
ओमप्रकाश अब तक सिर्फ भाजपा और सरकार का ही नाम लेकर हमले बोलते रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है इस बार उनके निशाने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे। यही नहीं, रैली में वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अन्य कई महत्वपूर्ण लोगों पर निशाना साधेंगे।
ओमप्रकाश अब तक सिर्फ भाजपा और सरकार का नाम लेकर ही हमले बोलते आ रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है इस बार उनके निशाने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी होंगे। यही नहीं, 27 अक्तूबर को होने वाली रैली में ओमप्रकाश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के अन्य कई महत्वपूर्ण लोगों पर निशाना साधेंगे। पार्टी के रणनीतिकारों से इस मुद्दे पर वह चर्चा भी कर चुके हैं।