हरियाणा और महाराष्ट्र फतह के बाद भाजपा ने मिशन यूपी के एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नजदीकी ओम माथुर को यूपी का प्रभारी बनाकर मिशन 2017 की रणनीति को अमली जामा पहनाने का काम सौंपा है। ऐसे में अमित शाह के प्रभारी पद से हटने के बाद अब मोदी और संघ की यूपी पर सीधी निगरानी रहेगी। साफ है, भाजपा हाईकमान यूपी को यहीं के नेताओं के हवाले नहीं छोड़ना चाहता।
कड़क छवि वाले माथुर के प्रदेश प्रभारी बनने से साफ है कि यूपी भाजपा को लेकर कुछ कड़े फैसले हो सकते हैं। यहां के मामलों में अब भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व का सीधा दखल होगा। ऐसे संकेत हैं कि प्रदेश भाजपा में कुछ और बदलाव हो सकते हैं।
मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले के निवासी और वहीं से राज्यसभा सदस्य ओमप्रकाश माथुर लंबे समय तक संघ के प्रचारक रहे हैं। वे राजस्थान भाजपा के संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष रहे। 62 वर्षीय माथुर भाजपा के उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और गुजरात के प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं।
गुजरात भाजपा के प्रभारी के रूप में उन्होंने अपने दायित्व को बखूबी निभाया। महाराष्ट्र चुनाव से पहले उन्हें भी वहां भेजा गया था। माना जाता है कि माथुर को जो भी दायित्व सौंपा गया है, उसे वे न केवल बखूबी निभाते हैं, वरन सफलता तक पहुंचाते हैं।
भाजपा के ऑपरेशन यूपी की शुरुआत
अभी तक अमित शाह प्रदेश भाजपा के प्रभारी थे। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद माथुर को यूपी भाजपा का प्रभारी बनाया गया है। लंबे समय तक गुजरात भाजपा का प्रभारी रहने और शानदार नतीजे के कारण माथुर को नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद लोगों में माना जाता है।
मोदी और संघ ने देश के सबसे बड़े राज्य में पार्टी की 2017 में सत्ता में वापसी के लिए उन पर दांव लगाया है। हाल ही लखनऊ में संघ के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में यूपी में भाजपा की स्थिति को लेकर असंतोष जाहिर किया गया था।
भाजपा ने जिस सूबे में छह महीने पहले ही 71 लोकसभा सीटें जीती थीं, वहां 12 में नौ विधानसभा सीटों के उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। ये सभी सीटें पहले भाजपा के कब्जे में थीं। माथुर को इसीलिए यूपी भेजा गया है ताकि वे संगठन को और सक्रिय कर मिशन 2017 के एजेंडे को आगे बढ़ा सकें।
नए चेहरों को मिलेगी तरजीह
हालांकि 2008 में राजस्थान में भाजपा की हार के बाद ओम माथुर ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन उनकी संठनात्मक क्षमता का पार्टी लोहा मानती है। वे जिन राज्यों में भेजे गए, वहां का रिजल्ट अच्छा रहा।
माथुर पार्टी में नए चेहरों पर दांव लगाने के लिए भी जाने जाते हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि यूपी में वे नई लीडरशिप खड़ी करेंगे। उनके संगठनात्मक प्रयोग में बाधा बनने वालों को किनारे भी किया जा सकता है।
विवादों में रह चुके हैं माथुर
ओम माथुर उस समय खासे चर्चा में आए थे, जब गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड में उनका नाम उछला था। एक तरह से उनकी छवि भाजपा के हार्डलाइनर नेता की है। यूपी में उन्हें लाकर भाजपा इसका लाभ उठाना चाहेगी।
यूपी भाजपा का राजस्थान कनेक्शन
यह संयोग है या फिर पार्टी की योजना का हिस्सा कि यूपी भाजपा के प्रदेश प्रभारी और महामंत्री संगठन जैसे दोनों अहम पदों का दायित्व राजस्थान से जुड़े लोगों को सौंपा गया है। ओम माथुर की तरह प्रदेश भाजपा के महामंत्री संगठन सुनील बंसल भी राजस्थान के निवासी हैं।