लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ताश के पत्तों की तरह फेंटे जा सकते हैं आला अफसर। इसके लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। अफसरों में ‘सरकार’ की ‘गुडबुक’ में आने के लिए होड़ मची है।
पहली सूची में दो दर्जन से ज्यादा डीएम समेत करीब 100 अफसरों के तबादले की संभावना जताई जा रही है। नियुक्ति और गृह विभाग माथापच्ची में जुटा है।
पहली सूची जल्द ही जारी होने के आसार हैं। इसमें उन अधिकारियों का हटना तय माना जा रहा है जो एक ही जगह तीन साल या उससे ज्यादा समय से तैनात हैं।
मनचाही तैनाती चाहने वाले अफसर अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा में जुटे हैं।
भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि मनचाही पोस्टिंग के लिए आईएएस, पीसीएस, आईपीएस और पीपीएस अफसर तो अपने आकाओं के जरिये दबाव बना ही रहे हैं, सत्ता के करीबी अफसर अपने रसूख का इस्तेमाल करने में भी पीछे नहीं हैं।
चुनाव में वफादारी दिखाकर सरकार की ‘गुडबुक’ में नाम दर्ज कराने की अफसरों में होड़ सी लगी है। कई अफसर तो सपा के शीर्ष नेताओं और कद्दावर मंत्रियों के यहां हाजिरी लगा रहे हैं।
जिन जिलों के डीएम बदले जाने हैं उसकी कवायद पहले से ही चल रही थी लेकिन अब औपचारिक रूप से प्रस्ताव तैयार कराकर सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजने की तैयारी है।
नियुक्ति विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि 1 जून 2010 से 31 मई 2014 तक जिन अधिकारियों के एक ही जगह पर तीन साल पूरे हो रहे हैं उनका हटना तय है। चुनाव आयोग ने एक जगह तीन साल से जमे अफसरों को हटाने का निर्देश दिया है।
भरोसेमंद अफसरों की तलाश लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार जिलों में ऐसे भरोसेमंद अफसरों की तैनाती करना चाहती है जो उसके अनुकूल काम कर सकें। जिलों में ऐसे अफसरों को भेजने पर ज्यादा जोर है जो स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करें और उन पर अंगुली भी न उठे।