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मिलिए इंडिया की ‘ब्लेड रनर’ से

Tue, 04 Feb 2014 08:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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माउंट एवरेस्ट चढ़कर पहली भारतीय निशक्त महिला पर्वतारोही बनने वाली अरुणिमा सिन्हा ने दूसरे लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा दिये है।
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रियो पैरालंपिक में भाग लेकर पदक जीतने का ख्वाब संजोए अंबेडकर नगर की युवा एथलीट ने ‘ब्लेड रनर’ के बनकर प्रैक्टिस शुरू कर दी है।

फिलहाल उनका लक्ष्य अप्रैल में होने वाले नेशनल पैरा गेम्स की 100 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण जीतना है, जिससे कॉमनवेल्थ के लिए अपनी दावेदारी पेश की जा सके।

यहां पर मिली सफलता की गारंटी उन्हें 2016 रियो के पैरालंपिक गेम्स का टिकट दिला सकते हैं।

सोमवार शाम सरोजनी नगर साई सेंटर में अभ्यास करने पहुंची अरुणिमा सिन्हा ने बताया कि मुझे बीती 23 जनवरी को हैदराबाद के दक्षिण रिहैबलीटेशन सेंटर से दो आर्टीफीशियल पैरों का सेट मिला है, जिसकी लागत तकरीबन 13 लाख रुपए है।
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इसमें से एक को पहनकर ट्रेनिंग कर रही हूं। जब इसे पहनकर दौड़ने में सहज हो जाएगी, तब दूसरे ब्लेड ‘चीता’ का उपयोग शुरू करूंगी।

हालांकि हैदराबाद से मिली जानकारी के अनुसार चीता ब्लेड का इस्तेमाल कंपटीशन के लिए किया जाए तो बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि पैरा गेम्स में जहां तक मेरी स्पर्धा का सवाल है तो कम दूरी की रेस को प्राथमिकता दे रही हूं।
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फिलहाल 100 मीटर और 200 मीटर में अभ्यास करने की प्लानिंग है, जिसमें 100 मीटर को मुख्य स्पर्धा बनाया है।

आगामी 16 फरवरी को कोयंबटूर के लिए रवाना होगी, जहां की स्वामी विवेकानंद फिजिकल यूनीवर्सिटी में एक माह की स्पेशल ट्रेनिंग करके तमिलनाडु में अप्रैल माह में होने वाले नेशनल पैरा गेम्स के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करूंगी।

अगर वहां पदक मिलता है, तो कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलने की संभावना बढ़ जाएगी।
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