लखनऊ। या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के बीच बच्चे, बूढ़े और नौजवानों ने दहकते अंगारों पर चलकर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। करबला के शहीदों के गम डूबे अजादार दहकते अंगारों पर ऐसे चल रहे थे, मानों फूल पर चल रहे हों।
अंजुमन-ए-सोगवार-ए-हुसैन की ओर से बुधवार को आसिफी इमामबाड़े में आग पर मातम किया गया। अंजुमन के सचिव सैयद आसिम नदीम रिजवी ने बताया कि करबला का मंजर याद कर अजादारों ने दहकतों अंगारों पर चलते हुए शहीदों को पुरसा दिया। उधर, अंजुमन नय्यरुल इस्लाम की ओर से हुसैनाबाद स्थित कर्बला मलका जहां में हजरत अली असगर के गहवारे की जियारत कराई गई। करबला के शहीदों के गम में महिलाओं और बच्चों ने हजरत अली असगर की निशानी झूला (गहवारा) का बोसा लिया।