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नौकरी की तलाश में हैं तो पढ़ लें ये खबर, ऐसे भी हो सकती है ठगी

Mon, 19 Jun 2017 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो प‌िक
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एनआरएचएम के चपरासी ने तीन बेरोजगारों को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 60 लाख रुपये ठग लिए। तीनों युवकों को जाली नियुक्ति पत्र थमाकर फर्जी सेंटर पर ट्रेनिंग भी कराई। 
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ठगी का पता चलने पर युवकों ने रुपये वापस मांगे तो उन्हें बंधक बनाकर पीटा और किसी से शिकायत न करने के वादे पर छोड़ा। आरोपी के चंगुल से छूटने के बाद तीनों ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर लखनऊ की पारा पुलिस ने केस दर्ज किया है।

पुलिस के मुताबिक, उन्नाव के थाना बिहार के राधागंज निवासी शशांक गुप्ता, शिशिर चंद्र शुक्ला व प्रतापगढ़ के संदवा चंडिका निवासी दुर्गेश सिंह से रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी की गई। 
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उन्होंने पारा थाना के रामविहार कॉलोनी निवासी एनआरएचएम (नेशनल रूरल हेल्थ मिशन) में चपरासी विनोद दुबे, उसके बेटों विजय शंकर, वैभव दुबे और उसके  साथी पंकज, बृजेश यादव, विपुल खंड निवासी महेश त्रिपाठी व हजरतगंज निवासी शिवप्रकाश मिश्र पर 60 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्त पत्र थमाने और बंधक बनाकर पीटने व लूटपाट का केस दर्ज कराया। 

तीनों युवकों ने आरोपियों ने 20-20 लाख रुपये ठगे। पीड़ित युवकों का कहना है कि अंबेडकरनगर के बलिया गांव के मूल निवासी विनोद ने रेलवे में 20 लाख रुपये में टीसी के पद पर नौकरी दिलाने का वादा किया था। 

ऐसे फूटा भांडा

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इसमें दस लाख एडवांस व दस लाख नियुक्ति पत्र मिलने पर देने की बात तय हुई थी। झांसे में आए युवकों ने पारा क्षेत्र में विनोद के बताए स्थान पर अक्तूबर 2014 में दस-दस लाख रुपये दिए। 

वहां विनोद अपने दोनों बेटों व साथियों समेत मौजूद था। इसके बाद तीनों को नवंबर 2014 के दूसरे हफ्ते में डाक से नियुक्ति पत्र मिले। उसमें 24 से 28 नवंबर के बीच ईस्टर्न रेलवे हावड़ा में जॉइन करने को कहा गया था। 

नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही दिन विनोद ने तीनों को कॉल करके जानकारी ली और शेष रकम के साथ नियुक्ति पत्र की फोटो कॉपी लेकर पहुंचने को कहा। तीनों से रकम लेने के साथ उसने साथियों से परिचय कराया। 

इसके बाद ईस्टर्न रेलवे में जॉइनिंग के संबंध में मानकनगर की स्लीपर ग्राउंड कॉलोनी में तीन माह की ट्रेनिंग कराई। सेंटर पर चार सौ अन्य युवक प्रशिक्षण ले रहे थे। ट्रेनिंग के बाद मेडिकल प्रमाण पत्र डाक से उनके पते पर भेजा। इस दौरान मूल प्रपत्र जमा करा लिए गए। 


युवकों का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान ईस्टर्न रेलवे के हावड़ा डिवीजन में मंडल रेल प्रबंधक ने सियालदह भेजने की बात कही और ट्रेनिंग पूरी होने पर मंडल रेल प्रबंधक के पीए से संपर्क करने के निर्देश दिए। 

वहां पहुंचने पर पता चला कि तीनों के नाम से नियुक्ति पत्र जारी ही नहीं हुआ था। फोन पर संपर्क करने पर जालसाजों ने उन्हें कुछ दिन रुककर इंतजार करने को कहा। दो हफ्ते ईस्टर्न रेलवे हावड़ा भर्ती बोर्ड के चक्कर काटने पर पता चला कि नियुक्ति पत्र से लेकर ट्रेनिंग तक फर्जी थी।
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बंधक बनाकर पीटा

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तीनों ने जब विनोद के ऑफिस पहुंचकर उलाहना दिया तो उसने घर पर बैठकर बात करने को कहा। घर पहुंचने पर साथियों की मदद से उन्हें बंधक बनाकर पिटाई की। 

जान से मारने की धमकी पर तीनों ने किसी से शिकायत न करने की बात कहकर पीछा छुड़ाया। आरोप है कि थाने व पुलिस अधिकारियों के यहां सुनवाई न होने पर कोर्ट में अर्जी दी, तब जाकर केस दर्ज हुआ।

एसटीएफ ने पकड़ा था फर्जी ट्रेनिंग सेंटर
एसटीएफ ने पिछले वर्ष 13 मई को मानकनगर की स्लीपर ग्राउंड कॉलोनी में रेलवे अफसर अरविंद बहादुर सिंह को आवंटित आवास पर छापा मारकर फर्जी ट्रेनिंग सेंटर पकड़ा था। 

सेंटर संचालक दिलीप सिंह, सह संचालक कुणाल श्रीवास्तव, शिक्षक मुकेश कुमार, एजेंट रवीश रावत, राजेश शर्मा, राजीव, जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू, अशोक व अमित को गिरफ्तार किया गया था। 

पूछताछ में खुलासा हुआ कि कोलकाता निवासी रजनीश सिंह कुछ दिन पहले छुट्टी लेकर भाग निकला है और मास्टर माइंड बिहार के सीवान का रहने वाला है। 
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