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लखनऊ में डायरिया व कॉलरा के बाद अब टाइफाइड की दस्तक

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लखनऊ। राजधानी में डायरिया, कालरा के बाद अब टाइफाइड ने परेशानी बढ़ा दी है। निजी व सरकारी अस्पतालों से लेकर सीएचसी पर रोजाना 300 से अधिक मरीज बुखार के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से 60-70 मरीज टाइफाइड के मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन इलाकों में डायरिया, कालरा फैला था वहां से अब टाइफाइड के केस मिल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी साफ पानी की सप्लाई का दावा कर रहे हैं तो ये बीमारियां कैसे फैल रही हैं।
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बलरामपुर अस्पताल की फीवर क्लीनिक ओपीडी में बुखार के 100 से अधिक मरीज आ रहे हैं। रोजाना 50 से अधिक की खून की जांच कराई जा रही हैै, जिनमें टाइफाइड के 10 से 12 मरीज मिल रहे हैं। इसी तरह सिविल की ओपीडी में बुखार के 100-120 मरीज आ रहे हैं। इनमें से 50 के खून की जांच कराई जा रही है तो टाइफाइड के आठ से 10 मामले निकल रहे हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष के मुताबिक, अभी वायरल के मरीज अधिक आ रहे हैं। टाइफाइड के भी कई केस मिल रहे हैं। लोकबंधु अस्पताल में टाइफाइड के रोजाना पांच से छह केस मिल रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि बुखार के 40-50 मरीज आ रहे हैं। बीआरडी महानगर में टाइफाइड के चार से पांच और बुखार के 40-50 मरीज आ रहे हैं।
हर लैब में औसतन दो से तीन टाइफाइड के केस
राजधानी की बड़ी निजी लैब में रोजाना टाइफाइड के दो या तीन केस मिल रहे हैं। निजी लैब प्रभारियों का कहना है कि अगस्त में बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें से दो या तीन केस टाइफाइड के मिल रहे हैं। निरालानगर स्थित लैब के मैनेजर ने बताया कि उनके यहां अगस्त में अभी तक 90 से अधिक सैंपल आए हैं, जिनमें से 15 में टाइफाइड के मामले हैं। शहर की हर निजी लैब में रोजाना टाइफाइड के औसतन दो से तीन केस निकल रहे हैं।
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गंदे पानी से फैलता है टाइफाइड
केजीएमयू के डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक, टाइफाइड गंदा पानी पीने से फैलता है। कई बार बारिश के मौसम में पीने के पानी में दूषित पानी मिल जाता है। इससे यह बीमारी हो सकती है। संस्थान में टाइफाइड के मरीज आ रहे हैं। ब्लड टेस्ट तथा कल्चर के आधार पर इसका पता चलता है।
शहर में डायरिया, कालरा की वजह क्या?
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल के मुताबिक, डायरिया दूषित खाना खाने के साथ गंदा पानी पीने से भी फैला है। ऐसे में सबसे अहम बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की स्टेट लैब में हुई पानी की जांच में नमूना पास हो चुका है। इससे साफ है कि पानी की गुणवत्ता ठीक है। मलिन बस्ती में नालियों से होकर पाइप लाइन गुजरी मिली थी। इनमें लीकेज से नाली का पानी घरों तक पहुंचा होगा। यह भी एक वजह सामने आई है।
पानी के 3400 से अधिक ले चुके सैंपल
जलकल के जीएम एसके वर्मा के मुताबिक, राजधानी के अलग-अलग इलाकों से 3400 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। सभी जगह पानी में क्लोरीन की मात्रा मिलने से एक भी सैंपल फेल नहीं हुआ है। संवेदनशील इलाकों में टीम भेजकर पानी की जांच कराई जा रही है। सीएमओ ने बताया कि इन इलाकों में लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी जा रही है। बालू अड्डा, खदरा, फैजुल्लागंज में नियमित रूप से पानी की जांच कराई जा रही है। नगर निगम इलाके में सफाई पर विशेष जोर दे रहा है। फैजुल्लागंज, खदरा, मशालची टोला, पुराने लखनऊ के कई इलाके, बालू अड्डा समेत कई अन्य इलाके संवेेदनशील हैं।
टाइफाइड के लक्षण
पीड़ित व्यक्ति के सिर में दर्द होता है।
शरीर में दर्द, कमजोरी के साथ दस्त की समस्या।
102 से 104 डिग्री तक बुखार रहता है।
बड़े में कब्ज तथा बच्चों में दस्त हो सकता है।
बालू अड्डा में बुखार, टाइफाइड के मिले मरीज
कालरा से राहत मिलने के बाद बालू अड्डा में अब बुखार संग टाइफाइड का प्रकोप बढ़ गया है। हर दूसरे घर में एक या दो लोग बुखार की जद में हैं। इनकी कुल संख्या 50 से अधिक है। कुछ मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, शुक्रवार को इलाके में टाइफाइड के छह मरीज मिले। वहीं, पीएचसी में औसतन 30 से अधिक मरीज बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इतने ही मरीज निजी क्लीनिक पर आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बालू अड्डा पीएचसी पर टाइफाइड, मलेरिया और डेंगू की जांच की व्यवस्था शुरू कराई। आशा बहु भी घर-घर जाकर दवा दिलवा रही हैं।
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