विदेशों से आने वाला खतरा केवल बर्डफ्लू, इबोला ही नहीं हैं। कालाजार भी एक बड़ी बीमारी बनकर उभरी है जोकि विदेशों से भारत में पहुंच रही है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, कालाजार में ड्रग रेजिस्टेंस की दिक्कतों के चलते यह बीमारी खतरनाक रूप लेती जा रही है।
भारत सरकार भी इस बीमारी को अपनी प्राथमिकता में लेकर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के जरिए इसके खात्मे का काम करेगी।
सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में 25वीं नेशनल कांग्रेंस ऑन पैरासिटोलॉजी में शनिवार को कालाजार बीमारी का मुद्दा उठा।
कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक और सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार डॉ. विश्वमोहन कटोच ने कहा कि हमें कालाजार की बीमारी को मिटाने के लिए काम करना होगा।
एक परजीवी बीमारी होने के चलते इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। लाखों की संख्या में हर साल लोग पूरे देश में इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं।
केंद्र सरकार ने योजना बनाई है कि कालाजार की बीमारी को लेकर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया जाए।
कालाजार की बीमारी को नियंत्रित करने के साथ इसकी बेहतर डायग्नोस्टिक और इलाज हम कर सकेंगे।
उन्होंने वैज्ञानिकों से भी कहा कि वह कालाजार सहित दूसरी बीमारियों के लिए अपने रिसर्च को प्रायोगिक शक्ल दें। इससे ज्यादा संख्या में मरीजों को फायदा मिल सके।