इमरजेंसी में अंदरूनी चोटों का पता लगाने के लिए एक्स-रे, सीटी और एमआरआई नहीं अल्ट्रासाउंड मशीन ही काफी है, वो भी पोर्टेबल।
दुर्घटना में घायल मरीज के फेफड़ों में हवा भर जाए, या पेट के अंदर ब्लीडिंग हो रही हो तो इसका पता अल्ट्रासाउंड से लगाया जा सकता है। इससे समय पर जरूरी इलाज मिल जाएगा और जान बच जाएगी।
संजय गांधी पीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप साहू ने ये जानकारी इमरजेंसी एंड ट्रॉमा वर्कशॉप में शुक्रवार को दी।
इंडोयूएस इमरजेंसी मेडिसिन समिट के तहत पीजीआई के मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में नर्स, टेक्निशियन व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को इसकी हैंड्स ऑन ट्रेनिंग (लाइव प्रशिक्षण) दी गई।