उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने 17 बस अड्डों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में बनाने के लिए सोमवार को नई शर्तों के साथ फिर से टेंडर जारी कर दिया है। इनमें लखनऊ के तीन बस अड्डे भी शामिल हैं। निर्माणकर्ता निवेशक को अब ये बस अड्डे 60 साल की लीज पर दिए जाएंगे। निवेशकों को इन बस अड्डों के निर्माण पर लगभग 2548 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
परिवहन निगम ने बस अड्डों के निर्माण के लिए दो साल का समय दिया है। पहले यह समय डेढ़ साल ही था। इसी तरह निवेशक बस अड्डे के व्यवसायिक निर्माण को अब सात साल में बनवा सकेंगे। जबकि पहले व्यावसायिक निर्माण के लिए सिर्फ पांच साल की मोहलत दी गई थी। निवेशक 20 सितंबर दोपहर तीन बजे तक टेंडर फॉर्म भर करके निगम की वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं।
इन बस अड्डों के लिए निकाला गया टेंडर
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निर्माण के लिए 10 वर्ष से चल रही कोशिश
परिवहन निगम के इन बस अड्डों को पीपीपी मोड में बनाने की कोशिश दस साल से चल रही है। इसके तहत एक ही भवन में नीचे बस अड्डा और ऊपर वाले हिस्से में मॉल बनाया जाएगा। सबसे पहले बसपा सरकार में यह कार्य निवेशकों को सौंपने का प्रस्ताव बना था, लेकिन वह ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि निगम लगातार टेंडर निकाल कर बस अड्डे बनवाने का प्रयास कर रहा था, मगर पहले की सेवा शर्त के कारण निवेशक नहीं मिल सके थे।