सरकारी अस्पतालों में खुले जन औषधि केंद्रों पर अब पहले से भी सस्ती दर पर दवाएं मिल रही हैं। कई जेनेरिक दवाओं के दाम कम हुए हैं, जो पहले महंगी हुआ करती थीं। इनमें बीपी-शुगर व मस्तिष्क से जुड़ी कई दवाएं हैं। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि दवाओं की नई खेप आने बाद दाम कम हुए हैं। इसका फायदा मरीजों को मिल रहा है।
शहर के 11 सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र का संचालन हो रहा है। नए टेंडर के बाद कंपनी ने लाइसेंस नहीं लिया था। पुराने लाइसेंस पर सभी केंद्र खुल गए थे। ड्रग विभाग ने आपत्ति लगाते हुए सभी केंद्र फरवरी में बंद करवा दिए थे। ऐसे में अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीज बिना दवा लिए लौट रहे थे।
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मार्च के आखिरी हफ्ते में अस्पतालों को ड्रग लाइसेंस मिला था, जिसके बाद सभी केंद्र खुले।अस्पतालों में खुले जन औषधि केंद्र में अब तीन से अधिक दवाएं हैं। जन औषधि केंद्र के प्रभारियों का कहना है बीपी-शुगर व मस्तिष्क रोग से जुड़ी कई दवाओं के दामों में भी कमी आई है। पहले से 10 - 15 फीसदी सस्ती दर पर दवाएं मरीजों को मिल रही हैं।
पेटेंट हटने बाद सस्ती हुईं दवाएं
जन औषधि केंद्र के प्रभारी ने बताया कई जेनेरिक दवाएं पेटेंट होती हैं। जब इन दवाओं से पेटेंट हटता है तो दवाएं सस्ती हो जाती हैं। पेटेंट दवाओं पर कमीशन 80 से 90 फीसदी होता है। पेटेंट हटने बाद ये दवाएं आधे से कम दाम पर आ जाती हैं।
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दस फीसदी तक नई दवाओं के कम हुए दाम, इनमें बीपी-शुगर व मस्तिष्क रोग की कई औषधियां
| दवा के नाम |
पहले |
अब |
| विल्डाग्लिक्टिन 50 एमजी |
50 |
35 |
| लीनाग्लिपटिन 5 एमजी |
45 |
38 |
| टेनेलीग्लिप्टिन 20 एमजी |
50 |
20 |
| सिटाग्लिप्टिन फोसफेट 100 एमजी |
100 |
80 |
| सकुबिट्रील एंड वलसारटन 50 एमजी |
220 |
72 |
| सकुबिट्रील एंड वलसारटन 100 एमजी |
400 |
140 |
| टोलपेरीसोन 150 एमजी |
30 |
15 |