पहला इनोवेशनः ब्रेस्ट कैंसर होने पर बगल के नीचे की कोशिकाओं (लिम्फ नोड) में संक्रमण पता करने के लिए अलग-अलग विदेशी डाई का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत भारत में 1100 रुपये और अमेरिका में 500 डॉलर तक औसत है।
पीजीआई में चिकित्सकों की टीम ने इसकी जगह मैथिलीन ब्ल्यू कलर डाई का उपयोग किया। जेनरिक डाई से इसका खर्च केवल दो रुपये प्रति मरीज आया। इंजेक्शन के रूप में इस डाई को कैंसर प्रभावित कोशिका को चिह्नित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
दूसरा इनोवेशनः ब्रेस्ट में ट्यूमर होने के बाद उसकी रेडियोथैरेपी की जाती है। इससे ट्यूमर सिकुड़कर कम होने लगता है। साइज कितना कम हो रहा है। यह जानने के लिए एक विदेशी कंपनी के उपकरण के साथ मार्जिन मार्कर लगाया जाता है।
इसकी कीमत 1,000 रुपये से लेकर कई हजार तक में होती है। इसके लिए पीजीआई के सर्जन डॉ. गौरव अग्रवाल ने सिल्वर के तार का उपयोग किया। एक सेमी साइज के सिल्वर तार को विसंक्रमित करने के बाद लंबर पंक्चर सुई के साथ उपकरण बनाया गया।
केवल 15 रुपये के खर्च में यह पूरा काम हो गया। अब इस तरीके को एम्स जैसे संस्थान ने उपयोग करना शुरू किया है।