फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खुशखबरीः दिल के मरीजों को नहीं सहना पड़ेगा दर्द

Mon, 08 Jun 2015 11:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अब एंजियोग्राफी के लिए और दर्द नहीं सहना पड़ेगा। संस्थान के कार्डियोलॉजिस्ट की टीम ने मरीजों को राहत पहुंचाने और किसी भी तरह के खतरे से उबारने के लिए हाथ की नर्व्स में कैथेटर डाल एंजियोग्राफी शुरू कर दी है।
विज्ञापन


इस नई तकनीक की मदद से मरीजों को ब्लीडिंग का खतरा नहीं रहता है और कम समय में ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

पहले पैर से केथेटर डालकर एंजियोग्राफी करने में मरीज को पांच से छह घंटे तक पैर सीधा रखना पड़ता था। क्योंकि किसी तरह के मूवमेंट पर भीतर ही भीतर ब्लीडिंग हो सकती है। हाथ में कैथेटर डालकर दो घंटे में जांच हो जाती है।

डॉ.भुवन चंद्र ने बताया कि अब तक सात मरीजों की एंजियोग्राफी नए तरीके से हो गई। किसी को कोई परेशानी नहीं है। टीम में शामिल डॉ. नवीन जाम्बवाल और डॉ. सुदर्शन बताते हैं कि कम समय में एंजियोग्राफी होने से जांच के लिए मरीजों ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा।
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

पहले एंजियोग्राफी थी दर्द भरी

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.भुवन चंद्र बताते हैं कि अब तक लोहिया संस्थान में हृदय की धमनियों के ब्लॉकेज जांचने के लिए पैर के रास्ते कैथेटर डाल एंजियोग्राफी की जाती थी।

यह तकनीक मरीजों के लिए दर्द भरी होती थी व किसी तरह की लापरवाही पर भीतर ब्लीडिंग होने का खतरा रहता था। डॉ.भुवन ने बताया कि हाथ की कलाई के पास नर्व्स को पंचर कर कैथेटर डाला जाता है जिसे रीडियल आर्टरी कहा जाता है।

इस तकनीक में डाई को डाला जाता है और डाई जहां रुक जाती है तो उससे पता चल जाता है कि धमनियों में ब्लॉकेज कहां है। हाथ के सहारे डाई व कैथेटर डालने में ब्लीडिंग का खतरा न के बराबर होता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें