हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय में व्याप्त समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए दायर जनहित याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को नोटिस जारी किया है।
साथ ही केंद्र सरकार को पक्ष पेश करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने आदेश हरिहर प्रसाद दीक्षित की जनहित याचिका पर दिए। इसमें याची ने इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में गंभीर अनियमितताएं होने संबंधी यूजीसी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश की है।
उसने विवि में ऐसे हालात के संबंध में कार्रवाई किए जाने की गुजारिश की थी। कोर्ट ने रिपोर्ट देखने के बाद मामले से याची को अलग करते हुए प्रकरण का स्वत: संज्ञान ले लिया था।
अदालत ने अपने आदेश में उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि यह विश्वविद्यालय पूरी तरह नष्ट होने व ढहने के कगार पर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार व वित्त अधिकारी किसी में आपस में तालमेल नहीं है। इनके बीच संबंध चौंकाने वाले हैं। यह भी कहा गया कि ये तीनों किसी सरकारी मसले पर भी आपस में बैठकर चर्चा नहीं कर सकते हैं और इनके बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाते रहते हैं।