मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनहित में एक अहम कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार की समस्त योजनाओं व सुविधाओं में लागू शपथ पत्र (हलफनामा) देने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
अब छात्रों को शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए भी शपथपत्र नहीं देना होगा। आवेदकों को स्वप्रमाणित व स्वघोषित प्रमाणपत्र से ही सरकारी योजनाओं का लाभ व सुविधाएं मिल सकेंगी।
प्रदेश में जाति-प्रमाणपत्र हो या निवास प्रमाणपत्र अथवा बेरोजगारी भत्ता व अन्य सुविधाएं, आवेदकों को इसके आवेदन के साथ शपथपत्र देने का प्रावधान है।
शिक्षण संस्थाओं में दाखिले और कृषि यंत्रों के आवेदन के साथ भी आवेदक को शपथपत्र देना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण व आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर तत्काल प्रभाव से इस व्यवस्था को समाप्त करने का निर्देश दिया है।
सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सरकारी योजनाओं व सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अब शपथ पत्र के स्थान पर आवेदक की ओर से स्वप्रमाणित व स्वघोषित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना ही पर्याप्त माना जा जाएगा।
राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि ई-गवर्नेंस के अंतर्गत आने वाली सुविधाओं से जुड़े प्रमाणपत्र लोकवाणी व जनसुविधा केंद्र से प्राप्त हो जाते हैं।
मगर कई सुविधाओं में शपथपत्र का प्रावधान होने की वजह से आवेदक को कचहरी से हलफनामा बनवाना पड़ता है।
इसमें पैसा तो लगता ही है, समय की भी काफी बर्बादी होती है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से आम लोगों के धन व समय दोनों की बचत होगी और दौड़धूप से राहत मिलेगी।
आय प्रमाणपत्र के संबंध में शपथपत्र की व्यवस्था पिछले साल दिसंबर में समाप्त कर दी गई थी। अब समस्त सुविधाएं व योजनाएं शपथपत्र से मुक्त होंगी।
प्रमुख सचिव राजस्व केएस अटोरिया ने बताया कि इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।