चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, कोराना वायरस की पुष्टि करने वाली जांच की सुविधा सिर्फ केजीएमयू लखनऊ में थी। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) दिल्ली से समन्वय करके एसजीपीआई, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, झांसी मेडिकल कॉलेजों में भी जांच की सुविधा शुरू करने की अनुमति ली जा रही है।
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बीएचयू और जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं को उच्चीकृत करने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 08 डायग्नोस्टिक फैसेलिटी तैयार करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्रवाई चल रही है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों-संस्थानों में टास्क फोर्स गठित किया गया है।
पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वीपमेंट (पीपीई) किट, रीएजेंट, मास्क, थर्मल स्कैनर और अन्य उपकरणों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्तिकर्ता से संपर्क करके एक महीने के लिए व्यवस्था की जा रही है। बृहस्पतिवार को उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के साथ एसजीपीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिल विभाग के हेड प्रो.आरके सिंह, केजीएमयू के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की हेड प्रो.अमिता जैन, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो.केके गुप्ता, स्टेट नोडल अधिकारी (कोरोना) डॉ. विक्रम सिंह भी मौजूद थे।