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जिला प्रशासन की नजर में ब्रह्माशंकर पाक-साफ

Wed, 27 Nov 2013 01:03 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
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कुशीनगर जिला प्रशासन का दावा है कि ब्रह्माशंकर त्रिपाठी के वर्ष 2012 में मंत्री बनने के बाद कोई भी सरकारी जमीन उनके नाम दर्ज नहीं हुई है।
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जिन सरकारी जमीनों को लेकर शिकायत की गई है, उन पर 2004 से ही कब्जे हैं।

इन जमीनों को मंत्री और उनके परिजनों से मुक्त कराकर सरकारी अभिलेखों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंत्री के खिलाफ विधायक निधि के दुरुपयोग की शिकायत भी सही नहीं पाई गई है।

त्रिपाठी के मंत्री बनने के बाद बेटे को बिना टेंडर के ठेके आवंटित किए जाने के मामले में लोकायुक्त ने जिला प्रशासन ने रिपोर्ट तलब की है।

कुशीनगर के डीएम रिग्जियान सैंफिल ने ब्रह्माशंकर त्रिपाठी के खिलाफ जमीन कब्जाने की शिकायतों की जांच करके लोकायुक्त को अपनी विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।

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इसमें 2012 के बाद ब्रह्माशंकर के नाम कोई भी जमीन सरकारी अभिलेखों में दर्ज न होने का दावा करते हुए डीएम ने उन सरकारी जमीनों का भी उल्लेख किया है जिन पर मंत्री व उनके परिजनों का पहले से कब्जा चला आ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार ये कब्जे 2004 से ही हैं और इन्हें वापस लेने के लिए राजस्व न्यायालय के जरिये कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

जमीनों को मुक्त कराने के साथ-साथ राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त किया जा रहा है। लोकायुक्त अब शिकायतकर्ताओं के हलफनामे के आधार पर इस रिपोर्ट का परीक्षण कर रहे हैं।
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कुछ और बिंदुओं पर मांगीं सूचनाएं
लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने बताया कि डीएम की रिपोर्ट मिल गई है। इस पर आगे जांच की जा रही है। विधायक निधि के दुरुपयोग की शिकायत फिलहाल सही नहीं पाई गई है।

शिकायतकर्ता ने ब्रह्माशंकर त्रिपाठी के मंत्री बनने के बाद उनके बेटे को बिना टेंडर के ठेके आवंटित करने की शिकायत की है।

इस पर जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। कुछ और बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है जिनके संबंध में प्रशासन से सूचनाएं मांगी गई हैं।
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