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सबने डाले हथियार, राहुल के खिलाफ अकेला 'विश्वास'

Fri, 28 Mar 2014 03:26 PM IST
रमाकांत तिवारी/अमर उजाला, अमेठी
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हाई प्रोफाइल अमेठी की सियासी फिजां में ‘अति विश्वास’ के रंग साफ दिख रहे हैं।
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एक तरफ ‘आप’ नेता कुमार विश्वास गांव-गिरांव की गलियों की खाक छान जहां जनता के समर्थन का दावा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस अमेठी में बदलाव जैसी आशंका को लेकर बेफिक्र है।

कांग्रेस की बेफिक्री का आलम यह है कि चुनावी अधिसूचना के बाद राहुल गांधी का एक भी दौरा अमेठी में नहीं हुआ है।

राहुल गांधी के चुनाव संचालन का जिम्मा संभालने वाली उनकी बहन प्रियंका वाड्रा अभी क्षेत्र से दूर हैं। भाजपा, बसपा और सपा जैसे मुख्य विपक्षी दलों के खेमे में भी सन्नाटा पसरा है।
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भाजपा ने अभी तक नहीं उतारा प्रत्याशी

हाई प्रोफाइल अमेठी संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार अब तक लय नहीं पकड़ सका है।

सपा ने यहां पहले की तरह एक बार फिर प्रत्याशी न उतारकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को वॉकओवर दे रखा है।

भाजपा का प्रत्याशी अब तक घोषित नहीं है। कुछ स्थानीय नेताओं के नाम की चर्चा है।

यह भी माना जा रहा है कि पार्टी नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से कांग्रेस के पत्ते खुलने के बाद ही इस पर कोई फैसला लेगी।

बसपा से धर्मेंद्र प्रताप सिंह जरूर मैदान में हैं लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता कम ही है।

राहुल, प्रियंका दोनों ही हैं नदारद

इन सबके बीच आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास 12 जनवरी को अमेठी में हुई जनसभा के बाद से क्षेत्र में जमे हैं।

वे जनता के समर्थन का दावा कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस उनके दावे को लेकर बेफिक्र दिख रही है।

आलम यह है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद राहुल गांधी अमेठी में एक दिन भी नहीं आए हैं।

पूर्व के लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चुनाव संचालन की कमान प्रियंका वाड्रा के हाथ में है लेकिन वे भी अब तक अमेठी नहीं पहुंची हैं।
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2 को नामांकन करेंगी सोनिया

कांग्रेसियों की मानें तो दो अप्रैल को सोनिया गांधी रायबरेली से नामांकन करेंगी।

मां के नामांकन के बाद प्रियंका वाड्रा रायबरेली और अमेठी की कमान अपने हाथ में ले लेंगी।

अमेठी के आंकड़े गवाह हैं कि 1980 में संजय गांधी के सांसद बनने के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो गांधी नेहरू फैमिली के खिलाफ विपक्षी दलों ने खानापूरी की औपचारिकता ही निभाई है।
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