सैफई महोत्सव पर दंगे के दाग मिट भी नहीं पाए थे कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने अखिलेश की मुश्किलें दोबारा बढ़ा दी हैं। अब दबाव है इस्तीफे का।
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मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे को रोकने में यूपी सरकार की विफलता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सूबे के विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मुख्य विपक्षी दल बसपा, कांग्रेस व रालोद ने प्रदेश सरकार से इस्तीफा मांगा है। इन दलों ने कहा है कि अगर सरकार इस्तीफा न दे तो राज्यपाल को तत्काल उसे बर्खास्त कर देना चाहिए।
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भाजपा प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग करने राज्यपाल के पास पहुंच गई।
हर पार्टी ने मांग लिया इस्तीफा
दंगों में सरकार की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यूपी में सियासत गर्मा गई है। बेनी ने गुरुवार को अखिलेश से इस्तीफा मांग लिया तो और भी पीछे नहीं रहे।
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रदेश सरकार को दंगा व वहां लोगों के जानमाल का नुकसान न रोक पाने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ राजभवन पहुंचकर राज्यपाल बीएल जोशी से मुलाकात कर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।
कांग्रेस के उपाध्यक्ष सत्यदेव त्रिपाठी, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने भी प्रदेश सरकार को दंगे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफा देने की मांग की है।
बर्खास्त हो गुंडों-माफिया की सपा सरकार: BSP
बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि पार्टी का यह आरोप पूरी तरह से साबित हो गया है कि प्रदेश की सपा सरकार गुंडों व माफिया की सरकार है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रदेश सरकार को यह फटकार स्वागतयोग्य है कि दंगा प्रभावित परिवारों को अनुग्रह राशि देने से अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती है।
वास्तव में सपा सरकार की दंगा रोकने की मंशा नहीं थी, वरना इतने बड़े पैमाने पर जानमाल की हानि हो ही नहीं सकती थी।
अस्थायी शरणार्थी शिविरों पर बुलडोजर चलवाने और शिविरों में पैदा हुए करीब 50 नवजात बच्चों की मौत के लिए भी सपा सरकार जिम्मेदार है। इसे तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए।
सपा की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति जिम्मेदार: BJP
भाजापा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि पार्टी का यह पहले से मत रहा है कि मुजफ्फरनगर दंगा के लिए सपा सरकार की कुख्यात मुस्लिम तुष्टिकरण नीति जिम्मेदार है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में प्रदेश सरकार और मुजफ्फरनगर प्रशासन को इसका जिम्मेदार माना है। इससे भाजपा के प्रारंभिक आरोपों की पुष्टि हो गई है।
शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर प्रदेश सरकार को बर्खास्त करने की केंद्र से सिफारिश की जानी चाहिए।
नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे सरकार: Cong
कांग्रेस में कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
कोर्ट के फैसले से इस बात की पुष्टि होती है कि भाजपा व सपा मिलकर दंगे फैलाकर सांप्रदायिकता के आधार पर चुनावी फायदा उठाना चाहते हैं।
लिहाजा सपा सरकार को नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
अगर सरकार नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं देती है तो जिस मंत्री के टेलीफोन के बाद मुजफ्फरनगर में दंगा भड़का था, उसे तत्काल बर्खास्त करे।
रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह साबित हो गया है कि मुजफ्फरनगर दंगों पर प्रदेश सरकार नियंत्रण करने में नाकाम रही है।
कोर्ट ने भी इसके लिए सीधे तौर पर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
इससे साबित होता है कि मुजफ्फरनगर दंगा सपा व भाजपा की सोची समझी साजिश का नतीजा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार ने समय से जरूरी कदम नहीं उठाए। लिहाजा मुजफ्फरनगर में हालात बिगड़ने के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है।