पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट के नेटवर्क के जरिये भारतीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश का खुलासा हुआ है, जिसकी जांच अब एनआईए (NIA) ने अपने हाथ में ले ली है। यूपी एटीएस द्वारा नोएडा से गिरफ्तार किए गए तुषार चौहान और समीर खान पर सोशल मीडिया के जरिए जुड़कर ग्रेनेड हमलों, हत्याओं और टीटीएच के प्रचार की साजिश रचने का गंभीर आरोप है।
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पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क के जरिये भारतीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शिकंजा कसा है। एजेंसी की लखनऊ इकाई ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
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एनआईए अब नेटवर्क के विदेशी हैंडलरों, आर्थिक मदद के स्रोतों और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के पूरे तंत्र का पता लगाएगी। जांच के दायरे में शहजाद भट्टी, उसका सहयोगी आबिद जट और उनसे जुड़े अन्य संदिग्ध हैं।
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आबिद जट के संपर्क में थे पकड़े गए आरोपी
दरअसल, उत्तर प्रदेश एटीएस ने 23 अप्रैल 2026 को नोएडा से बागपत निवासी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान और दिल्ली निवासी समीर खान को गिरफ्तार किया था। जांच में दोनों के पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट के संपर्क में होने की बात सामने आई थी।
आरोप है कि विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर दोनों उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ग्रेनेड हमले करने और कुछ लोगों की हत्या की साजिश रच रहे थे। इसके बदले उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान पहुंचाने और वहां बसाने का भरोसा दिया गया था। एटीएस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अब एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली है।
इंस्टाग्राम से शुरू हुआ संपर्क, फिर मिलने लगे कथित टास्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक, तुषार चौहान की पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से शहजाद भट्टी और आबिद जट से हुई थी। शुरुआत में सोशल मीडिया पर बातचीत हुई, जो बाद में वॉयस और वीडियो कॉल तक पहुंच गई।
आरोप है कि तुषार ने शहजाद का भरोसा हासिल करने के लिए उसके नाम से सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाए। उसने अपनी पहचान बदलकर हिजबुल्लाह अली खान रख ली थी। इसके बाद वह पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में सक्रिय हो गया और कथित तौर पर उन्हें दिए गए निर्देशों पर काम करने लगा।
युवाओं को जोड़ने और टीटीएच के प्रचार की जिम्मेदारी
जांच में समीर खान की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि वह शहजाद भट्टी और आबिद जट के सीधे संपर्क में था। उसे सोशल मीडिया के जरिये अन्य युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने और तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (टीटीएच) के नाम का प्रचार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
संगठन के नाम से दीवारों पर नारे लिखने की बात भी जांच में सामने आई थी। एजेंसियों को आशंका है कि युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर देश में अशांति फैलाने की साजिश रची जा रही थी।
एटीएस की जांच में 20 से अधिक धमकी भरी कॉल का मामला भी सामने आया था। आरोप है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर कॉन्फ्रेंस कॉल के माध्यम से इन कॉल से जुड़ते थे। कुछ लोगों को धर्म परिवर्तन और अन्य मुद्दों को लेकर धमकियां दिए जाने की बात सामने आई थी। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया चैट की जांच में विदेशी संपर्कों के संकेत मिले थे। एनआईए अब इन कॉल के पीछे सक्रिय लोगों और विदेशी हैंडलरों के बीच संबंधों की पड़ताल करेगी।
फंडिंग और नेटवर्क के विस्तार का पता लगाएगी एजेंसी
एनआईए की जांच का प्रमुख हिस्सा नेटवर्क की फंडिंग और संचालन का तरीका होगा। एजेंसी पता लगाएगी कि विदेशी हैंडलर भारतीय युवाओं तक कैसे पहुंचते थे, उन्हें किस तरह के काम सौंपे जाते थे और कथित आतंकी गतिविधियों के लिए धन कहां से उपलब्ध कराया जाता था।
सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और चैट जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि नेटवर्क से कितने युवा जुड़े हैं और देश के दूसरे हिस्सों में इसकी गतिविधियां कितनी फैली हुई हैं। विदेशी संपर्कों से लेकर स्थानीय स्तर पर सक्रिय संदिग्धों तक की भूमिका की जांच के बाद पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जाएगी।